बेटी (रश्मि नामदेव की ज़बर्दस्त कविता )

Sufi Ki Kalam Se

. बेटी

कोमल मृदुल सी प्यारी है बेटियां
घर आंगन की शान है बेटियां

मां का दुलार
पिता का सम्मान है बेटियां

चिड़िया सी चहकती
फूलों सी महकती है बेटियां

तितली सी उड़ती
घर आंगन को मधुबन बनाती है बेटियां

शीतल ,कोमल, चंचला
गुड़िया सी कोमल
नन्ही परी है बेटियां

त्याग समर्पण की मूरत है बेटियां
एक नहीं दो घरों की शान है बेटियां

रश्मि नामदेव शारीरिक शिक्षिका एवं सेल्फ डिफेंस मास्टर ट्रेनर जिला- कोटा, राजस्थान


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