गेस्ट पॉएट डा. प्रोफेसर नश्तर बदायूँनी साहब का रूमानी गीत

Sufi Ki Kalam Se

गीत

मैनें तुझसे मेरे महबूब मोहब्बत की है,
यानी दिल से तेरी दिन रात इबादत की है!
मैनें तुझसे ——-

तेरी अदा पे सौ जान से क़ुर्बान हूँ मैं, तेरे दुख दर्द का हर वक़्त निगेहबान हूँ मैं,
तूने इस तरह मेरे दिल पे हुकूमत की है!
मैनें तुझसे —————-

साथ गुज़रे हुए लम्हात नही़ भूला हूँ, जो दिये तूने है़ सौग़ात नहीं भूला हूँ!.
तूनें रूसवा न किया इतनी इनायत की है!
मैनें तुझसे मेरे महबूब—-

तेरी आखोँ में मुहब्बत के शरारे देखे, इन हसीँ लम्हों में कितनें ही नज़ारे देखे, मेरे मैहबूब ये किया तूने क़यामत की है
मैनें तुझसे मेरे————

तू नही़ तो मेरा बेकार है ये रगों सुख़न, तै किया है यही नश्तर ने तेरा तर्के सुख़न ,
शायरी इसने फ़क़त तेरी बदौलत की है,
मैनें तुझसे मेरे महबूब मुहब्बत की है!.

- डा. प्रोफेसर नश्तर बदायूँनी

गेस्ट पॉएट डा. प्रोफेसर नश्तर बदायूँनी

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