पढ़िए मशहूर कॉमेडियन वीर दास की नयी, चर्चित और विवादित कविता “आई कम फ्रॉम टू इंडियाज’

Sufi Ki Kalam Se

भारत के मशहूर कॉमेडियन वीर दास ने हाल ही में अमेरिका के एक शो में अपनी नयी कविता पढ़ कर नयी बहस को जन्म दे दिया है। वीर दास ने अपनी नयी, चर्चित और विवादित कविता “आई कम फ्रॉम टू इंडियाज’ मे भारत की दो तस्वीरें पेश की है। जिस तरह वीर दास ने अपनी कविता में भारत देश को दो तरह से परिभाषित किया है उसी तरह देश के लोगों ने भी इस कविता पर दो तरह से प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। एक वर्ग इस कविता का समर्थन कर रहा है तो दूसर इसे देश का अपमान बताते हुए विरोध कर रहे हैं।
आइए देखें, कि वीर दास ने अपनी कविता में क्या कहा है। कविता पढ़कर आप खुद भी अपनी राय कॉमेंट बॉक्स में लिखकर बताये….

मैं उस भारत से आता हूं, जहां एक्यूआई 9000 है लेकिन हम फिर भी अपनी छतों पर लेटकर रात में तारे देखते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम दिन में औरतों की पूजा करते हैं और रात में गैंगरेप करते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं जहां आप हमारी हंसी की खिलखिलाहट हमारे घर की दीवारों के पार से भी सुन सकते हैं, 
और मैं उस भारत से भी आता हूं जो कॉमेडी क्लब की दीवारें तोड़ देता है, जब उसके अंदर से हंसी की आवाज आती है।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां ओल्ड लीडर्स अपने मरे पिता के बारे में बात करना बंद नहीं करते, और न्यू लीडर्स अपनी जीवित मां के रास्तों पर चलना शुरू नहीं करते।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां की एक बड़ी आबादी तीस साल से छोटी है लेकिन फिर भी 75 साल के लीडर्स के 150 साल पुराने आइडिया को सुनना बंद नहीं करती।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां लोग क्लब के बाहर सड़कों पर सोते हैं लेकिन साल में बीस बार तो सड़क ही क्लब होती है।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम वेजेटेरियन होने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन उन्हीं किसानों को कुचल देते हैं, जो ये सब्ज़ियां उगाते हैं। मैं उस भारत से आता हूं जो कभी चुप नहीं होता और मैं उस भारत से आता हूं जो कभी नहीं बोलता।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम बॉलीवुड की वजह से ट्विटर पर बंटे होते हैं लेकिन थिएटर के अंधेरे में उसी बॉलीवुड की वजह से एक साथ होते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां बच्चे मास्क लगा कर एक दूसरे का हाथ थामते हैं और मैं उस भारत से भी आता हूं, जहां के लीडर्स बिना मास्क लगाए गले मिलते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम जब भी ‘ग्रीन’ के साथ खेलते हैं ब्लीड ब्लू का नारा देते हैं लेकिन ग्रीन से हारने पर हम अचानक से ऑरेंज हो जाते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां म्यूजिक हमारा बहुत हार्ड है लेकिन जज्बात बहुत सॉफ्ट हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जो ये देखेगा और कहेगा ‘ये कॉमेडी नहीं है जोक कहां है!  और मैं उस भारत से भी आता हूं, जो ये देखेगा और जानेगा कि ये बहुत बड़ा जोक ही है. बस फ़नी नहीं है।”


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13 thoughts on “पढ़िए मशहूर कॉमेडियन वीर दास की नयी, चर्चित और विवादित कविता “आई कम फ्रॉम टू इंडियाज’

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