आखिर मुसलमान जाल में फंस ही गया?

Sufi Ki Kalam Se

आखिर मुसलमान जाल में फंस ही गया?
आरोपी अब भी खुलेआम, जबकि मुसलमानों की कुर्बानियों का सिलसिला शुरू

पहले जाल बिछाया फिर दाना डाला और फिर शुरू हुआ खेल मुसलमानों को उस जाल तक लाने का। मुसलमान ठहरे जज्बाती और इसका फायदा उठाया फिर से नेताओं ने।
देश में कई दिनों से महंगाई, बेरोजगारी, जीडीपी जैसे मुद्दे गरम थे, जिनका सरकार के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था और सरकार पर आश्रित गोदी मिडिया भी लगभग बेरोजगार था तभी ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा आया और सब ठीक होने लगा। सरकार फिर से अपना काम करने के लिए आजाद थी क्यूंकि मीडिया को मंदिर मस्जिद वाले टॉपिक का रोजगार मिल गया था। इसी दौरान एक टीवी डिबेट मे भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने इस्लाम के पैग़म्बर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की जो उनकि अगली सोची समझी साजिश का हिस्सा था। नूपुर शर्मा ने जो कहा वो गलत था और ये बात, वह भी अच्छे से जानती है और देश के सभी नागरिक भी इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि किसी के धर्म या उनके ईश्वर /देवी देवताओं का अपमान गलत है लेकिन फिर भी जान बूझकर राष्ट्रीय स्तर के चैनल पर इस तरह के बयान को सोची समझी साजिश के तहत प्रसारित किया गया। जिस प्रकार से ये पूरा प्रोपेगेंडा खडा किया गया उसे एक साजिश कहना ही न्यायोचित होगा। नूपुर शर्मा के इस आपत्तिजनक बयान के बाद कहीं दिनों तक देश भर में छिटपुट विरोध होता रहा क्यूंकि देश के मुसलमानों के पास भी तो इतना टाईम नहीं है ना कि वह हर मामले पर त्वरित कार्रवाई करे और जिन्होंने त्वरित कार्रवाई करनी चाही वह भी किसी के नेतृत्व के इंतजार में बैठे रहे, आखिर कोई विरोध की पहल करेगा तभी तो आम मुसलमान उसमे शामिल होगा ना क्यूंकि एक तरफ़ तो देश में साम्प्रदायिक माहौल चरम पर है और दूसरी तरफ देश का आम मुसलमान अपने आप में इतना सक्षम भी नहीं है कि वह खुद विरोध करने लगे।


बहरहाल! इसी कशमकश में कई दिन निकल गए । साजिशकर्ता भी सोचने लगे कि इतनी बड़ी बात पर अभी तक कोई रिएक्शन कैसे नहीं आया, आखिर उन्होंने भी तो मुसलमानो को उकसाने के लिए ये हथकंडा अपनाया था ना।
बात इधर से उधर घूमती रही और धीरे धीरे सरकती सरकती दुनिया भर में जा पहुंची। दुनिया भर के अनेक मुस्लिम देशों का अचानक से इस्लाम के लिए प्रेम का सैलाब उमड़ चुका था। उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया, कई चीजों का बहिष्कार किया, माफी की शर्त रखी, भारत के राजदूतों को तलब किया गया आदि कई तरह से प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जो करनी भी चाहिए क्यूंकि पैगंबर साहब केवल भारतीय मुसलमानों के पैग़म्बर नहीं है बल्कि पूरी दुनिया के पैग़म्बर है, लेकिन फिर क्या इन्हीं मुस्लिम देशों की अन्य मामलों मे जिम्मेदारियां नहीं बनती? भारत सहित दुनिया भर के मुसलमानों की अनगिनत समस्याएं है जिनके समाधान के लिए कोई मुस्लिम देश आगे नहीं आता। चीन, बर्मा, फिलिस्तीन जैसे कई देशों के पीड़ित मुसलमान इसके प्रत्यक्ष उदहारण है। खैर अभी सिर्फ ताजा मसले पर वापस आते हैं।
दुनिया भर के मुस्लिम देशों की प्रतिक्रियाएं देखकर भारत के मुसलमान भी जाग उठे और आनन फानन मे सोशल मीडिया पर कैम्पैन चलाया जिसका कोई नेतृत्वकर्ता भी नहीं था क्यूंकि मुसलमानों के नेतृत्वकर्ता तो सिर्फ फतवे देने, चांद की घोषणा करने किसी पार्टी का बहिष्कार आदि करने में व्यस्त होंगे इसलिए देश के आम मुसलमानों ने ही बिना कोई तैयारी के ही गुस्ताख़ ए नबी के आरोपियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।


बस यही आकर वो साजिशकर्ताओं के जाल में फंस गए जो जाल करीब एक महिने पहले बिछाया गया था उसमे देर से ही सही आखिरकार मुस्लमान फंस ही गया।
10 जून 2022 को जुमे की नमाज़ के बाद देश के कई हिस्सों में मुसलमानों ने अपनी नबी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जो उनका संविधानिक अधिकार भी है लेकिन आज के नए भारत में संवैधानिक अधिकारों की चिंता किसे है? सब मुँह खोल कर बैठे हैं कि कब मुसलमान कोई हरकत करे और वो अपना ज़हर उन पर उंडेले।
जुमे के दिन भी यही हुआ। देशभर में नमाज़ के बाद शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया जा रहा था तभी कुछ जगहों पर कुछ एसा हुआ या किया गया जिससे पुलिस को गोलियां चलाने का बहाना मिल गया और देखते ही देखते निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर गोलियों की बौछार कर दी गई। कई बेगुनाह मारे गए और कई अस्पतालों में ज़िन्दगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। दूसरी तरफ जो इस पूरे फसाद की जड़ थी, जिसकी गिरफ्तारी की मांग हो रही थी वो सरकार की कस्टडी में पूरी तरह सुरक्षित हैं।
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रात्मक देश में बस यहि दिन देखने बाकी थे जहां सरेआम किसी धर्म विशेष पर जानबूझकर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है और जब आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाती है उल्टे उन्हें ही गोलियां मार दी जाती है।


जानबूझकर की गई विवादित टिप्पणी से शुरू हुआ मामला अभी यही समाप्त नहीं हुआ है। अभी तो सिर्फ गोलियां मारी गई है, अब इन्हीं प्रदर्शनकारियों को ढूंढ ढूंढ कर इनके ऊपर देशद्रोह जैसे संगीन आरोप जड़े जाएंगे, और सारे घरवालों को पुलिस कस्टडी में लिया जाएगा उसके बाद इनके घरों के अवैध बताकर बुलडोजर चलाया जाएगा। उधर मुसलमानो के खून की प्यासी बैठी गोदी ने अपना काम शुरू कर दिया है। जिन्होंने आरोपी नूपुर शर्मा के खिलाफ एक लाइन भी नहीं कही थी वो अब मुसलमानों को आंतकवादी, जिहादी बताकर प्राइम टाइम करने में जुट गए हैं आखिर नमक का हक भी तो अदा करना है।
उक्त घटनाओ का अब अलग अलग तरीके से विश्लेषण किया जा रहा है और हर विशलेषण में मुसलमानों को ही दोषी माना जाने वाला है। कोई कहता है कि भारत के मुस्लिमों ने मुस्लिम देशों को भारत के खिलाफ भड़काया है जबकि वास्तविकता यह है कि पहले मुस्लिम देशों ने विरोध जताया उसके बाद भारतीय मुस्लिमों ने।
खैर बात जो भी हो आखिर में कटना खरबूजे को ही है।

नासिर शाह (सूफ़ी)


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5 thoughts on “आखिर मुसलमान जाल में फंस ही गया?

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