उपचुनाव से पहले मुस्लिम आंदोलकारियों को उदासीन करने मे ब्यूरोक्रेट्स के मार्फत सरकार कामयाब रही (गेस्ट ब्लॉगर अशफ़ाक कायमखानी का ब्लॉग)

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उपचुनाव से पहले मुस्लिम आंदोलकारियों को उदासीन करने मे ब्यूरोक्रेट्स के मार्फत सरकार कामयाब रही।
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राजस्थान की कांग्रेस सरकार के खिलाफ लगातार अल्पसंख्यकों के सम्बन्धित विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन करने वाले मुस्लिम संगठनों व उर्दू शिक्षक एवं पैराटीचर्स संघों के नेताओं को ब्यूरोक्रेट्स के मार्फत मुख्यमंत्री गहलोत आपसी समझ व विश्वास कायम कर उपचुनाव के ठीक पहले उन्हें मनाने मे कामयाब होती नजर आ रही है।
अल्पसंख्यकों के सम्बन्धित अनेक मामलो के हल करने की मांगो के अलावा उर्दू व मदरसा पैराटीचर्स की विभिन्न मांगो के लिये लगातार आंदोलन करने वाले उर्दू शिक्षक संघ व मदरसा पैराटीचर्स संघ के साथ विभिन्न सामजिक संगठनों के साथ समय समय पर सरकार से जुड़े मुस्लिम जनप्रतिनिधियों ने वार्ताएं तो की लेकिन वो मुख्यमंत्री तक उनकी बातो को ढंग से पहुंचाने मे पूरी तरह कामयाब नही हुये तो सर पर आये उपचुनाव के ठीक पहले उक्त संगठनों द्वारा आंदोलन तेज करके कांग्रेस को हराने का साफ ऐहलान करने के बाद हायर ब्यूरोक्रेट्स ने उनकी मांगो को उपर तक ढंग से पहुंचाया तो उनमे से अधीकांश मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुमे मुख्यमंत्री गहलोत ने 18-मार्च को विधानसभा मे बजट रिप्लाई मे उन मांगो को एक तरह से मानने की घोषणाऐ करके माहोल को एकदफा तो खुशनुमा बना दिया है।हालांकि कल मुख्यमंत्री द्वारा अल्पसंख्यकों के मुतालिक की गई विभिन्न घोषणाओं के बावजूद मदरसा पैराटीचर्स के स्थाईकरण जैसी प्रमुख मांग उसी तरह खड़ी हुई है, जैसे पहले खड़ी हुई थी। जिस मांग को लेकर अधिक बवाल मचता रहा है।
सुत्रो अनुसार उक्त आंदोलन कारियों से कुछ मुस्लिम विधायक व जनप्रतिनिधि समय समय पर धरना व प्रदर्शन स्थलों पर जाकर मिलते तो रहे लेकिन वो उनके व सरकार के मध्य खासतौर पर मुख्यमंत्री के मध्य आपसी विश्वास कायम करने सफल नही हो पाये। इसके कारण तो वो विधायक व जनप्रतिनिधि ही ठीक से जान सकते है। लेकिन पीछले कुछ दिनों से कुछ ब्यूरोक्रेट्स द्वारा इस सम्बंध मे इमानदारी से कोशिश करने का ही परिणाम निकला कि मुख्यमंत्री ने सदन मे कल कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं करके पहल की एवं उसका आंदोलनकारियों ने अच्छा संकेत माना है।

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