Right to Protest – राइट टू प्रोटेस्ट (गेस्ट ब्लॉगर “दरवेशदीपाश)

Sufi Ki Kalam Se

Right to Protest (राइट टू प्रोटेस्ट)

आजकल देश के सबसे बड़े सूबे में खूब उथल पुथल मची हुई है.. या यूं कह लो कि मचाई जा रही है । इसके पीछे वजह कोई बिल बताया जा रहा है । अब भैया आम जनता के लिए तो बिल का मतलब सिर्फ पैसा खर्च करने का बिल ही होता है, क्योंकि उस भोली जनता को क्या पता कि बिल क्या होता है, कभी उनके हुक्मरानों ने उन्हें बताने की जहमत ही कहां उठाई है ।

वैसे इस बिल की कहानी ये है कि सरकार पूरी नेक नीयती से जनता की अच्छी सेहत के लिए कोशिश कर रही है । मगर हमारे अस्पताल वाले डॉक्टर साब पता नहीं क्यों इस कोशिश को गलत ठहराने पर तुले हुए हैं ।
खैर मुद्दा जो भी हो… जनता बस यही चाहती है कि उसकी रोटी, कपड़ा और मकान की ख्वाहिश (जी हां, इसे हम आजकल ख्वाहिश ही कहेंगे) के साथ साथ अच्छी तालीम और सेहत का भी सपना पूरा हो जाए ।

और जो ये डॉक्टर साब आजकल अस्पताल छोड़कर नारेबाजी कर रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि हर सरकारी अफसरों को भी प्रोटेस्ट करने का हक़ मिलना चाहिए (राइट टू प्रोटेस्ट)…

जैसे सबसे पहले तो हमारे नेता लोगों को चाहिए कि वो भी खूब प्रोटेस्ट करें (विधानसभा, संसद के अंदर तो ये भलेमानुस करते ही रहते हैं) ।
जैसे इनकी सैलरी बढ़ानी हो तो प्रोटेस्ट करो, इनकी पेंशन चालू रखवानी हो तो प्रोटेस्ट करो, अपने रिश्तेदार परिचित को किसी तरह का फायदा नहीं मिला हो तो प्रोटेस्ट… मतलब भाईसाहब अगर गौर करके देखा जाए तो सबसे ज्यादा वजह इन्हीं के पास मिलेगी प्रोटेस्ट करने को… इसलिए एक बिल तो इनके लिए भी पास होना ही चाहिए ।

इसके अलावा सरकारी अफसरों को भी प्रोटेस्ट करना चाहिए कि हमें भी भैया हर दिन बस 2 घंटे की ड्यूटी मिलनी चाहिए, उसमें भी 1 घंटा लंच का होगा, और हफ्ते में कम से कम 3-4 दिन की छुट्टी भी होनी चाहिए (खैर वैसे ये ज्यादा बड़ी मांग नहीं है, क्योंकि साहब अभी भी वैसे ही इतनी छुट्टियां तो हर हफ्ते में टूर, निरीक्षण, दूसरी ड्यूटी के नाम पर कर ही लेते हैं) ।

और जनता जनार्दन (हां, यही वो लफ्ज़ है जो हर नेता के मुंह से हर चुनाव में सुनने को मिलता है और बाद में इसी जनार्दन की गर्दन को काटा जाता है) में बसे हुए कुछ स्वयंभू गरीब को भी हक़ मिलना चाहिए प्रोटेस्ट का, जिसमें वो अपने से ऊपर वालों को बता सके कि हमें अमीर नहीं बनना है, हमें तो गरीब ही रहना है क्योंकि जो मज़ा गरीब बनकर रहने में है वो अमीरी में कहां…
भले ही घर में टीवी हो, मोटर साइकिल और कार खड़ी हो, परिवार में कोई अच्छी कमाई कर रहा हो, मगर कागजों में ये गरीब ही रहना चाहते हैं ।
बड़े फायदे हैं जनाब इसके तो, हां-हां… सच कह रहा हूं…
सबसे कम रेट में राशन मिलता है, फ्री में घर में शौचालय बन जाता है, बिजली – पानी के सारे बकाया बिल माफ हो जाते हैं, ऐसी आराम की जिंदगी भला अमीरी में मिल सकेगी कभी ??

तो देखा आप सभी ने कितनी सारी वजह है इस राइट टू प्रोटेस्ट बिल को लाने की..!! और जो इस कदम में हमारा साथ नहीं दे, आप और हम मिलकर उसके खिलाफ़ प्रोटेस्ट करेंगे । (दरवेशदीपाश)


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