बाबरी मस्जिद का मसला खालिस दीनी मसला है – अख्तर बारानी

Sufi Ki Kalam Se

बाबरी मस्जिद का मसला खालिस दीनी मसला है।
तीन मस्जिदों को छोड़ कर दुनिया की तमाम मस्जिदों का मकाम व मर्तबा यक्सा है और सब मस्जिदें बैतुल्लाह की बेटियां है इन सब का इंतिजाम इंसिराम आबाद कारी और हिफाज़त दुनिया के तमाम मुसलमानों पर फ़र्ज़ है।
मस्जिदें इस्लामी शाआर है ये मुसलमानों के शिनाख्त की पहचान है।
अगर सिर्फ नियाय की लड़ाई होती तो बाबरी मस्जिद शहीद ना की जाती और सिर्फ दावे पर केस चलता। हम कानूनी लड़ाई नहीं हारे बल्कि कानून का झूटा नाम लेकर बहुसंख्यको की बाला दस्ती का शिकार हुए है, इसीलिए मामला अगर दीनी नहीं तो काशी, मथुरा ,भोजशाला ,आगरा ,टीले शाह (लखनऊ )जामा मस्जिद और ना जाने कितनी मस्जिदें यहां तक के आप के पड़ोस वाली मस्जिद भी निशाने पर ना होती।
ये दीनी मसला ही है के मस्जिद का कंपंशैट नहीं हो सकता वरना बताइए दुनिया में किस इमारत का बदल नहीं सकता? मस्जिद के बदले में कोई भी इमारत काबिले कुबूल नहीं चाहे वह मस्जिद ही क्यों ना हो शरिई मसला है।
बाबरी मस्जिद मस्जिद थी मस्जिद है और क़यामत तक मस्जिद रहेगी।
बुतो की पूजा होने से मस्जिद की हैसियत खत्म नहीं होती काबा से लेकर आया सोफिया और कबखाक आर्मेनिया तक की तारीख गवाह है
गेस्ट ब्लॉगर अख्तर बारानी


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