गर आज में जद पर हूं तू खुश गुमान मत होना…(अख्तर बारांनवी)

Sufi Ki Kalam Se

गर आज में जद पर हूं तू खुश गुमान मत होना!
चराग सब के भुजेंगे हवा किसी की नही!!
आज से बीस साल पहले 27सितम्बर2001 को मुल्क की कुल हिंद तलबा तंजीम को उस वक्त की जालिम हुकूमत ने आलमी मंजर नामा का फायदा उठा ते हुए जालिमाना तरीके से पाबंद कर दिया ! इस इकदाम से हुकूमत ये देखना चाहती थी कि इन नौजवानों के पीछे कितने उलमा व अकाबिरीन मौजूद है और हिंदुस्तान के कितने मुसलमान इन का साथ देते है!
लेकिन अफसोस सद अफसोस उलमा व अकाबिरीन की जबान इन की हिमायत में नही बोली और ना ही हिंदुस्तानी मुसलमानों ने भर पूर साथ दिया खैर अवाम से कोई शिकवा नहीं अवाम तो काईदीन की तरफ नजरे उठाए मुंतजिर रहती है शिकवा तो उन काईदीन व अकाबिरीन से है जो मिल्लत की लीडर शिप का दम भरते है और जो बड़े बड़े दस्तार व जुब्बे में मालबुस फलक नुमा टोपिया लगा कर आलीशान इदारे चलाते है! उस वक्त ये सोच रहे थे कि कहीं हमने इन नौजवानों का साथ दिया तो हम भी मुसीबत में आ सकते है और इस तरह ये समझ रहे थे कि हम तो सैफ है लेकिन आज वक्त ने ये साबित कर दिया की कोई भी सैफ नही है!सिर्फ अगर आप मुसलमान है और इस्लाम के लिए तन मन धन से लगे हुए है तो आप हुकूमत की एजेंसीज के रडार पर है फिर आप किसी भी मसलक के मानने वाले क्यों ना हो या कोई भी इदारा क्यो ना चलाते हो चाहे वोह मकतब, मदरसा,स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी ही क्यों ना हो! चाहे आप किसी दीनी जमात,फलाही इदारे या सियासी पार्टी ही से क्यो ना जुड़े हो !अब तो बात यहां तक पहुंच गई है कि जो लोग बहुत मोहतात तरीके से इस्लाम की दावत आम करते थे और जो लोग जमीन से नीचे और आसमान के ऊपर की बात करते थे जिन्हे अकामते दीन और गलबा दीन बोलने से डर लगता था!जो अपने प्रोग्राम पॉलिसी संविधान के दायरे में बनाते थे आज उसी संविधान को बुनियाद बना कर झूटे इल्जामात लगा कर उन अकाबिरीन को निशना बनाया जा रहा है
उसके कत्ल पे मैं भी चुप था
मेरा नंबर अब आया है
मेरे कत्ल पे आप भी चुप है
अगला नंबर आप का है
काश आज से बीस साल पहले उम्मत ने उन नौजवानों का भर पूर साथ दिया होता तो आज ये दिन ना देखना पड़ते
(गेस्ट ब्लॉगर अख्तर नदवी बारानी)


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