लोकतंत्र में धर्म की राजनीति से सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानो को क्यों ओर केसे ? (गेस्ट ब्लॉगर आरिफ अरमान)

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लोकतंत्र में धर्म की राजनीति से सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानो को क्यों ओर केसे ?


लोकतंत्र (लोकतन्त्र) एक ऐसी शासन प्रणाली है, जिसके अंतर्गत (अन्तर्गत) जनता अपनी स्वेच्छा से चुनाव में आए हुए किसी भी दल को मत देकर अपना प्रतिनिधि चुन सकती है, तथा उसकी सत्ता बना सकती है। लोकतंत्र (लोकतन्त्र) दो शब्दों से मिलकर बना है ,लोक + तंत्र (तन्त्र) लोक का अर्थ है जनता तथा तंत्र (तन्त्र) का अर्थ है भारत में लोकतंत्र की स्थापना के बाद संविधान को अमल में लाया गया ताकि हिन्दुस्तान के हर तबके के गरीब, पिछड़े, अल्पसंख्यक,दलित,आदिवासी लोगो को भी अपना जीवन सम्मानपूर्ण तरीके से जीने का हक दिया जाए, परन्तु इस लोकतंत्र में आज भी हम देखते है की इसी कई घटनाए हुई है जिनको देखते हुए लगता है कि अभी भी हमारे हिन्दुस्तान में लोकतंत्र को मजबूत करने की जरूरत है, आज भी एक दलित को घोड़ी पर से उतार दिया जाता है, एक काले को गोरो की नफरत का शिकार होना पड़ता है, एक मुसलमान को धर्म के आधार पर मार दिया जाता है, क्या आपको नहीं लगता कि देश में ऐसी घटनाओं से लोकतंत्र या संविधान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।


आज इस देश में धर्म की राजनीति करना सफलता का प्रमाण होता जा रहा है, देश की राजनीति में रोजगार,विकास,शिक्षा,स्वास्थ्य,जैसे मुद्दे कमजोर पड़ते जा रहे है, अब अगर देश में धर्म की राजनीति इसी तरह फलती फूलती रही तो हिन्दुस्तान में बहुसंख्यक राजनीति के सफल होने के चांस ज्यादा ही जाते है ,क्योंकि हिन्दुस्तान के लोकतंत्र में संख्या चलती है,ओर जिसकी संख्या ज्यादा होती है वहीं सरकार में होता है, ओर इसी धर्म के आधार पर चुनी हुई सरकार दूसरे धर्म के लोगो को निशाना बनाती है जिससे वो अपना वोट बैंक मजबूत करती रहती है ,ओर इसी तरह से उनका वोटबैंक खुश रहता है, ओर इसी तरह से सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानो ओर अल्पसंख्यकों का होगा इसमें कोई संदेह नजर नहीं आता है, इसलिए आज हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा लोकतंत्र ओर संविधान को बचाने की किसी की जिम्मेदारी है तो वो अल्पसंख्यकों ओर मुसलमानो की हो जाती है, क्योंकि जिसे नुकसान होता है उसे ही बदलाव लाना होता है, आज देश में धर्म की राजनीति को खत्म करने ओर समाज में भाईचारा स्थापित करने की सख्त जरूरत है, एक दूसरे धर्म के लोगो के बीच आपस में सामंजस्य स्थापित हो, भेदभाव को खत्म किया जाए, ओर लोकतंत्र को मजबूत करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, स्पष्ट रूप से ज़रूरत एक ऐसे धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व की है जो जनता की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आकांक्षाओं और उसके महत्व को समझने के मामले में दूरदर्शी हो,इसलिए हम सब लोगो को समाज में धर्म, जाति, क्षेत्र,वेशभूषा,लिंग,रंग,आदि पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ लोगो को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि देश की राजनीति धर्म से मुद्दों की राजनीति में परिवर्तित हो सके।
जय हिन्द



गेस्ट ब्लॉगर आरिफ अरमान
अध्यक्ष
FRATERNITY MOVEMANT MANGROL


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