गेस्ट पॉएट कॉलम में पढ़िए इमरान खान की ‘रमजान नज्म’

Sufi Ki Kalam Se

रोजा रखने वाले बंदे उठ जा तू
सहरी कर ले बंदे अब तो उठ जा तू

सहरी कर ले बंदे यह एक सुन्नत है
तेरी रोजी में खुदा की बरकत है

रोजा जो रखेगा तुझको जन्नत है
तुझ पर बरसेगी खुदा की रहमत है

रोजा रखने वाले बंदे उठ जा तू
सहरी कर ले बंदे अब तो उठ जा तू

भूख प्यास की शिद्दत जितनी लगती है
उतनी नेकी बंदे तेरी बढ़ती है

पंच वक्ता नमाज हम जब पढ़ते हैं
उतने ही गुनाह हमारे झड़ते हैं

रोजा रखने वाले बंदे उठ जा तू
सहरी कर ले बंदे अब तो उठ जा तू

कुराने तिलावत जब हम करते हैं
एक के बदले सत्तर नेकी पाते है

इफ्तारी शाम को सामने जब आती है
इफ्तार की रौनक कितनी बढ़ जाती है

रोजा रखने वाले बंदे उठ जा तू
सहरी कर ले बंदे अब तो उठ जा तू

तरावीह की नमाज़ जब हम पढ़ते हैं
कानों से कुरान जब हम सुनते हैं

रोजा हमारा जब मुकम्मल होता है
खुदा हमारा कितना खुश होता है

रोजा रखने वाले बंदे उठ जा तू
सहरी कर ले बंदे अब तो उठ जा तू

ना छोड़ बंदे एक भी रोजा तू
सारे रोजे रख के खुदा का हो जा तू

रोजा रखने वाले बंदे उठ जा तू
सहरी कर ले बंदे अब तो उठ जा तू ।

इस नज़्म को आप शायर की आवाज़ में YouTube channel पर भी सुन सकते हैं https://youtu.be/BULCa9hGfO8


Sufi Ki Kalam Se
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