गेस्ट राइटर अब्दुल कलीम खान दायरा का आर्टिकल ‘चमचा ‘

Sufi Ki Kalam Se

गेस्ट राइटर अब्दुल कलीम खान दायरा का आर्टिकल ‘चमचा’
मानव एक सामाजिक प्राणी है।समाज में रहकर समाज की मान मर्यादा का पालन करना उसका परम कर्तव्य बन जाता है ।मानव जीवन में एक दूसरे मानव का प्रभाव बहुत अधिक पड़ता है ।प्रायः देखा जाता है कि मानव ही मानव का शत्रु बन जाता है ।मानव ही मानव का शत्रु बन जाने के पीछे विभिन्न प्रकार के कारण होते हैं ,जिसमें मुख्य रूप से चमचा बन कर चमचागिरी से व्यक्ति के व्यक्तित्व का विनाश किया जाता है।
जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए एक
विशेष प्रजाति पाई जाती है। जिसका कार्य ही चमचागिरी करके अपना उल्लू सिद्ध करना ही एकमात्र प्रयोजन होता है। चमचागिरी करने वाले महाशय को परम विभूषित उपाधि चमचा से सम्मानित किया जाता है। चमचा उपाधि से गौरवान्वित व्यक्ति अपने आप को धन्य समझता है और अपने परम दे
मकसद चमचागिरी में तन मन धन से अपना संपूर्ण जीवन खुशी-खुशी दूसरों को पीड़ा देने में व्यतीत कर अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है।
चमचा एक ऐसा पर्याय बन जातहै जो जिस क्षेत्र में भी रहता है, वह वहां पर कार्य करने वाले प्रत्येक सदस्य को दुख देने में और स्वयं

दुखी रहने में अपने आप को समाज का सच्चा सेवक मानता है ।मेरे प्यारे चमचे जीवन में आप इसी प्रकार चमचागिरी करते हुए महानता के चरमोत्कर्ष पर पहुंचे ।आपको अपनी चमचागिरी सलामत रहे ।जिससे आप समाज के सच्चे सेवक बन सके ।आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में चमचा प्रजाति की संख्या में हो रही निरंतर बढ़ोतरी समाज के लिए परम हर्ष का विषय बनता जा रहा है। चमचे अपनी चमचागिरी के बलबूते पर विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त करते जा रहे हैं जो उनकी योग्यता का न्यूनतम प्रतिफल है ।उनको उनकी योग्यता के अनुसार प्रतिफल नहीं दिया जा रहा ।हमारे प्यारे चमचे जिस तन्मयता से समाज को विघटन की ओर ले जा रहे हैं ,उनकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। समाज के दुलारे प्यारे चमचो यह समाज आपसे अपेक्षा रखता है कि आप इसी प्रकार अपनी चमचागिरी के माध्यम से राष्ट्र के उज्जवल भविष्य का निर्माण करो ।संपूर्ण समाज आप की चमचागिरी के लिए आपका सदैव ऋणी रहेगा।


गेस्ट राइटर अब्दुल कलीम खान दायरा


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