सांसदों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने की फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल के अत्याचारों की निंदा

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सांसदों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने की फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल के अत्याचारों की निंदा

लगभग 80 के करीब सामाजिक संगठनों, संसद सदस्यों, कलाकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने इजराइल द्वारा फिलिस्तीनियों को जबरन बेदखल करने और इजरायल पुलिस द्वारा अल-अक्सा मस्जिद पर हमले करने को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

हस्ताक्षरकर्ताओं में एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, एआईसीसी सचिव शकील अहमद खान, सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम, बीएसपी के लोकसभा सांसद कुंवर दानिश अली, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति प्रो अख्तरुल वासे, लेखक और कलाकार शुद्धाब्राता सेनगुप्ता, कवि कौशिक राज और संगीतकार पूजन साहिल शामिल हैं।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने इजरायली सरकार से मस्जिद अल अक्सा की पवित्रता को बहाल करने और शेख जर्राह और अन्य स्थानों से फिलिस्तीनियों के निष्कासन को रोककर अपनी अमानवीय और नस्लवादी नीतियों को तुरंत रोकने का आह्वान किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इजरायल के राष्ट्रदूत को बुला कर फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपने हिंसक कार्यों को तुरंत रोकने के लिए इजरायल सरकार पर दबाव बनाने का भी आग्रह किया है।

घोषणा पत्र में लिखा है, “अपने उपनिवेश स्थापित करने और मस्जिद–ए–अक्सा पर अपना आधिपत्य कायम करने के लिए पवित्र माह रमज़ान में फिलिस्तीनीयों को शेख जर्राह और दूसरे इलाकों में अपने घरों से ज़बरदस्ती विस्थापित करना और शांतिपूर्वक नमाज़ पढ़ रहे लोगों पर गोलीबारी कर ज़ख्मी किए जाने की घटना से मुस्लिम समुदाय और पूरी दुनिया के सभ्य लोगों को आघात पहुंचा है।”

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के महासचिव जॉन डयाल और ऑल इंडिया अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष अशोक भारती ने इस घोषणा का समर्थन किया है। जमात ए इस्लामी हिंद, जमीयत ए उलेमा हिंद, जमीयत ए अहले हदीस और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया समेत कई संगठनों ने भी इस घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने आगाह किया है कि इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल मस्जिद अल अक्सा की पवित्रता का उल्लंघन करने वाली किसी भी गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई का वैश्विक स्तर पर प्रभाव हो सकता है। उन्होंने इजरायल सरकार को चेतावनी दी की वह किसी भी प्रकार का गलत कदम ना उठाए।

इस घोषणा के हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि इजरायली शासन की कार्रवाइयां नस्लवाद और रंगभेद का गठन करती हैं। इस तरह की कार्रवाइयों का न तो अंतरराष्ट्रीय कानून और न ही सभ्य समाज के सार्वभौमिक मूल्य समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, “
फिलस्तीनी आबादी के दमन के लिए सशस्त्र बलों द्वारा जारी हिंसा, अराजकता एक महामारी के समय में मानवता के खिलाफ एक गंभीर अपराध है,”।


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