ब्रोकरेज हाउसेज ने किया आगाह: कर्ज में डूबा भास्कर समूह, दिवालिया हो सकती है कम्पनी
-आयकर कार्रवाई के बाद 20% से ज्यादा टूटे शेयर, 28 हजार करोड़ का कर्ज

Sufi Ki Kalam Se

कॉर्पोरेट मंत्रालय की वेबसाइट में खुलासा

निवेशकों को ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह, जितना जल्दी हो डीबी कॉर्प से दूर हों

-ब्रोकरेज हाउसेज ने किया आगाह: कर्ज में डूबा भास्कर समूह, दिवालिया हो सकती है कम्पनी
-आयकर कार्रवाई के बाद 20% से ज्यादा टूटे शेयर, 28 हजार करोड़ का कर्ज

मुंबई. देश के प्रमुख ब्रोकरेज हाउसेज निवेशकों को आगाह करते हुए सलाह दे रहे हैं कि भास्कर समूह की एकमात्र लिस्टिेड कम्पनी ‘डीबी कॉर्प’ से यथाशीघ्र दूर हों। रिटेल निवेशक इसके शेयर जल्द बेच दें और नए निवेश से बचें क्योंकि यह कम्पनी जल्द ही दिवालिया हो सकती है।
कॉरपोरेट मंत्रालय की वेबसाइट में इसका खुलासा हुआ है। ब्रोकरेज हाउसेज का कहना है कि डीबी कॉर्प का शेयर अब तक 20 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। फिलहाल यह 91.5 रुपए चल रहा है। हाल ही समूह पर हुई आयकर कार्रवाई के बाद खुलासा हुआ है कि समूह पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है और इसके मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त होने के साक्ष्य भी मिले हैं। कॉरपोरेट मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार भास्कर समूह पर कुल 28,000 करोड़ का ऋण हो चुका है।
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ब्रोकरेज हाउसेज की यह भी सलाह
-बैंकों के हितों के रक्षा करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता हो। इसके लिए सरकार संबंधित बैंकों को डीबी समूह और इसकी अन्य इकाइयों से इन ऋणों की अतिशीघ्र वसूली के निर्देश दे।
-न्यायपालिका और सरकारें इस समूह की संपत्तियों और व्यवसायों की कुर्की शुरू करे ताकि बैंकों के लम्बित ऋणों की वसूली सुनिश्चित हो सके।
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मिले थे 2200 करोड़ के फर्जी लेन-देन
भास्कर समूह के विरुद्ध हाल ही हुई आयकर विभाग की कार्रवाई में 2,200 करोड़ के फर्जी लेन-देन सामने आए हैं। सीबीडीटी इनकी पड़ताल कर रही है। आयकर विभाग का आरोप है कि समूह ने 6 साल में लगभग 700 करोड़ की कर चोरी की। समूह 2,200 करोड़ के चक्रीय व्यापार में संलिप्त रहा। समूह ने स्टॉक मार्केट के नियमों का उल्लंघन किया। बोगस खर्चे दिखाने और बेईमानी से निधि निकालने के लिए कई कम्पनियां स्थापित की।
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कर्मचारियों के नाम पर बनाई कम्पनी
समूह के स्वामित्व वाली तथा सहयोगी को मिलाकर 100 से अधिक कम्पनियां हैं। जांच में पाया गया कि कर्मचारियों के नाम पर भी कई कम्पनियों का संचालन किया जा रहा है। इनका इस्तेमाल बोगस खर्चे दिखाने के लिए किया जा रहा है। वहीं, सूचीबद्ध कम्पनियों से प्राप्त लाभ को बेईमानी से ऐसी कम्पनियों में निवेश करने के लिए हस्तांतरित किया जा रहा है।


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