‘नौजवानों की जिम्मेदारी’ गेस्ट पोएट मे पढ़िए आरिफ काजी की नज्म

Sufi Ki Kalam Se

नौजवानों की जिम्मेदारी’
इज्जत ए मुल्क की हर हाल हमें लाज रखना है ।
जुल्म के खिलाफ बुलंद, हमे आवाज रखना है ।।

जाती मफाद के लिए लड़वाते रहेंगे यह नेता ।
हिंदू मुस्लिम एकता को, हमें मुमताज रखना है ।।

गिराने की कोशिश में रहता है हरदम दुश्मन इसे ।
नौजवानों देश को हमेशा, हमें परवाज़ रखना हैं ।।

तू कितना ही सहारा ले ले झूठ का ए बातिल ।
मरते दम तक सच्चाई का, हमें ताज रखना है ।।

हैवानियत की सारी हदें पार करेगा शैतान ।
सब्र और इंसानियत का, हमें लिहाज़ रखना है ।।

और आएंगे जाएंगे दुनिया में कितने ही फिरौन ।
दुआ है यार रब तेरे ही, हमें मोहताज़ रखना है ।।

ज़ालिम के खिलाफ ज्यादा और कुछ नहीं तो ।
एक हथियार के रूप में, हमें अल्फ़ाज़ रखना है ।।

शहीद हुए हैं देश के लिए कई सैनिक “काज़ी” ।
शाहदतों का कायम यूं ही, हमें रिवाज़ रखना है ।।

– आरिफ “काज़ी” मागंरोल, बारां


Sufi Ki Kalam Se

7 thoughts on “‘नौजवानों की जिम्मेदारी’ गेस्ट पोएट मे पढ़िए आरिफ काजी की नज्म

  1. Students do better overall with caring teachers. Studies have found
    that for students from pre-K to 12, positive student-teacher relationships increase engagement, motivation, prosocial —kind and helpful—behavior,
    and academic achievement. Seeing students as individuals is key to
    their well-being and success.

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