मस्जिद अल अक्सा में पिछले जुमे से जारी हिंसा ने लिया ज़ंग का रूप

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मस्जिद अल अक्सा में पिछले जुमे से जारी हिंसा ने लिया ज़ंग का रूप
फ़िलीस्तीन और इस्राइल के बीच फिर जंग शुरू

रमजान के आखिरी जुमे के दिन इसराईल के शहर पूर्वी यरूशलम में अचानक हिंसा भड़क उठी थी जिसमें कई फिलिस्तीनी एंव पुलिसकर्मी घायल हुए थे उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस संघर्ष ने अब जंग का रूप धारण कर लिया है जिसमें अब तक कई फ़िलीस्तीनयों के मारे जाने एंव घायल हो जाने की ख़बर है।
गौरतलब है कि मस्जिद ए अक्सा मे आखिरी जुमे के दिन, इफ्तार में दस हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए जो इफ्तार के बाद शैख जर्राह को खाली कराए जाने के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। अचानक ये प्रदर्शन हिंसक हो गया जिसमें फिलिस्तीनीयों की तरफ से बोतल एंव अन्य सामग्रियां फेंकी गई तो पुलिस ने रबर की गोलियों का ईस्तेमाल किया गया। देखते ही देखते हर दिन हिंसा बढ़ती गयी और आख़िरकार जंग में बदल गई। अब दोनों और से मिसाइलों के हवाई हमले शुरू हो चुके हैं जिनमे काफी जान और माल का नुकसान हो रहा है।

आइए जानते हैं इस जंग के कारण
मस्जिद अल अक्सा पर मुस्लिमों का दावा :-
मस्जिद ए अक्सा मुसलमानों की तीसरी सबसे बड़ी पवित्र जगह मानी जाती है जिसे किब्ला ए अव्वल भी कहा जाता है। यानी मुसलमान पहले इसी बैतूल मुकदद्स को अपना किब्ला मानकर इसकी तारफ मुँह करके नमाज अदा करते थे। हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम के ज़माने में उन्होंने यहूदियों को इस्लाम की तरफ मुतासिर करने के लिए बैतुल मुकद्दस को किब्ला ए अव्वल बनाया। तब से मुसलमान अल अक़्सा मस्जिद की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़ते थे और यह सिलसिला 17 महीनों तक जारी रहा। इसके अलावा कहा जाता है कि इसी जगह होकर पैगंबर हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (स.अ.) जन्नत तशरीफ ले गए थे। मस्जिद के निर्माण के इतिहास में भी इसे मुस्लिमों द्वारा बनाए जाने के पुख्ता प्रमाण मौजूद है।
कुरान और मस्जिद अल अक्सा :-
इस्लाम की सबसे पवित्र किताब कुरान में भी मस्जिद ए अक्सा का जिक्र है। कुरान मे सिर्फ तीन ही मस्जिदों का जिक्र है जिसमें अक्सा मस्जिद भी शामिल है जो मुसलमानों के दावे को मजबूत करता है।


यहूदियों का दावा :-
यहूदियों का मानना है कि मस्जिद अल अक्सा ही वह स्थान है जहां उनके इष्ट का जन्म हुआ, और जिन्होंने इसराईल को बनाया था। यहूदी यहां स्थित वेस्टर्न वॉल (टेम्प्ल माउंट) को अपना पवित्र स्थल मानते हैं।

ये सुनहरी गुम्बद की तस्वीर का भ्रम जाल फैलाकर असली मस्जिदे अक़्सा को शहीद करना उनको आसान होगा दुनियां तो सुनहरी गुम्बद को खड़ा देखेगी जबकि असल लड़ाई उस गुम्बद की है ही नही।

ईसाइयों का दावा :- मस्जिद अल अक्सा पर ना सिर्फ मुसलमान और यहूदी ही दावा करते हैं बल्कि ईसाई भी इसे अपना प्रमुख स्थान समझते हैं। ईसाई कह्ते है कि अलअक्सा मस्जिद के एक हिस्से पर ही हज़रत ईसा(मसीह) का जन्म हुआ था और वहाँ उनका “बैतुल अहम” (बैथलहम) है इसलिए इसाई भी इस जगह पर अपना दावा ठोकते है।

तीनों धर्मों (यहूदी, ईसाई और मुसलमानों) का सच :-
अगर तीनों धर्मों के इतिहास का गहनता से अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि पहले ये तीनों बड़े धर्म एक ही हुआ करते थे लेकिन आसमानी किताबों (जबूर, तौरात, इंजील और कुरान) की स्वीकार्यता के चलते पहले यहूदी और फिर ईसाई अलग हो गए। यानी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ) के ऊपर कुरान नाजिल होने के बाद से यह दोनों धर्म अलग हो गए लेकिन चूंकि सारी किताबे एक ही धर्म से संबंधित है और इनसे जुड़े धार्मिक स्थल और पैगंबर भी कॉमन है तो भविष्य में टकराव होना स्वाभाविक था। ऐसे में आज हर कोई मस्जिद अल अक्सा पर दावा कर रहा है।

मस्जिद अल अक्सा का आधुनिक इतिहास :-
प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक अधिकतर समय यहां मुसलमानो का शासन रहा। प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन के हाथो तुर्की की पराजय के बाद ब्रिटेन ने यहा यहूदियों को अस्थायी तौर पर बसाना शुरू कर दिया था और यही से इस नए विवाद ने भी पैर पसारने शुरू कर दिए थे।
उसके बाद द्वित्तीय विश्व युद्ध पर आते हैं जिसमें विश्व प्रसिद्ध तानाशाह हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों को ढूढ़ ढूंढ कर मारना शुरू कर दिया था और लाखों यहूदियों को मौत के घाट उतार भी चुका था, ऐसे में कुछ यहूदी शरणार्थी के रूप में यरूशलम आकर बस गए, जिन्हें यहा बसे तत्कालीन मुसलमानों (फिलिस्तीनीयों) ने शरण दी। लेकिन किसे पता था कि यही शरणार्थी एक दिन, इसी जगह के लिये इतना उत्पात मचायेंगे?

1967 का युद्ध :-
इस विवाद को लेकर 1967 में अरब देशों और इस्राइल के बीच एक महत्वपूर्ण युद्ध हुआ जिसमें अरब देशों की हार हुई और इस्राइल ने ने यरुशलम के काफी स्थान पर कब्जा कर लिया, तबसे लेकर आज तक इस्राइल के यहूदी फ़िलीस्तीन के मुसलमानों पर जुल्म करते रहे हैं और उनकी इबादतों में खलल डालते हुए उन पर जान लेवा हमले करते रहे हैं।

शैखजर्राह :-
उपरोक्त हालातों के बाद स्थिति यह आ चुकी है कि मस्जिद ए अक्शा के पास जहा फिलिस्तीनी बसते है उसे शैखजर्राह कहते हैं और यहूदी उस स्थान को खाली कराए जाने को लेकर आए दिन फिलिस्तीनीयों पर हमले करके उन्हें बेघर करते हुए मार देते हैं। चूंकि ज्यादातर हिस्सों पर यहूदियों का कब्जा है और सबसे महत्वपूर्ण, पूरे क्षेत्र पर उनका नियंत्रण होने के कारण वह सेना का दुरुपयोग कर फिलिस्तीनीयों पर अत्यंत जुल्म कर रहे हैं। इनसे परेशान होकर फिलिस्तीनीयों ने सयुंक्त राष्ट्र में केस दायर किया हुआ है, जंहा के निर्णय में भी फिलिस्तीनीयों को राहत मिल चुकी है लेकिन इस्राइल है कि मानने को ही तैयार नहीं है।

अल अक्सा मस्जिद और सयुंक्त राष्ट्र संघ:-
ज्ञातव्य हो कि सयुंक्त राष्ट्र संघ की यूनेस्को शाखा अक्टूबर 2016 में यह प्रस्ताव पारित कर चुकी है कि एतिहासिक अल अक्शा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा नहीं है। फिर भी इस्त्राइल , पूर्वी यरूशलम सहित सम्पूर्ण क्षेत्र पर अपना अधिकार बताता है तो वही फ़िलीस्तीनी पूर्वी यरूशलम को आजाद देश की राजधानी बताते हैं।
आगे क्या :-
लगातार पनप रहे इस विवाद में एक बार फिर से पूरी दुनिया शामिल होने लगी है। अरब और तुर्की के बाद दुनिया के कई दूसरे मुस्लिम देश फ़िलीस्तीन के समर्थन में आकर खड़े हो गए हैं तो दूसरी तरफ एंटी मुस्लिम विचारधारा वाले विभिन्न देशों के लोग इस्राइल के समर्थन में। ऐसे में पूरे विश्व में काफी टकराव की स्थिति बनी हुई है।

सोशल मीडिया हैशटैग कैम्पैन :-

आजकल किसी भी बात को बढावा देने मे सोशल मीडिया का काफी बड़ा योगदान है। दुनिया के ज्यादातर देश निर्दोष फिलिस्तीनीयों पर हो रहे शोषण के विरुद्ध खड़े है और आई स्टैंड फिलिस्तीन वाला हैशटैग ( #istandwithpelistine) ट्रेंड करा रहे हैं तो दूसरी ओर हमेशा एंटी मुस्लिम ऐक्टिविटी का अवसर तलाशने वाले लोग इस्त्राइल की इन शर्मनाक हरकतों का समर्थन कर आई स्टैंड इस्त्राइल (#IstandwithIsrael ) का हैश टैग चला रहे हैं। ऐसे लोगों को या तो मामले की पूरी जानकरी नहीं है या फिर जानकरी होते हुए भी एंटी मुस्लिम एक्टिविटी मे शामिल होने का मोका मिल रहा है इसलिए इस्त्राइल के समर्थन में खड़े है। जो भी हो लेकिन दुनिया पहले ही कोरोना जैसी महामारी से जुझ रही है और ऐसे में विभिन्न देशों का यह युद्द विश्व शांति के लिए खतरा बनकर मंडरा रहा है।

  • – नासिर शाह (सूफ़ी)

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