पॉपुलर फ्रंट के महासचिव ने नागरिकता अधिसूचना को चुनौती देते हुए दायर की पीआईएल

Sufi Ki Kalam Se


09 जून 2021

पॉपुलर फ्रंट के महासचिव ने नई नागरिकता अधिसूचना को चुनौती देते हुए दायर की पीआईएल

नई दिल्लीः पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के महासचिव अनीस अहमद ने गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा जारी उस विवादास्पद अधिसूचना की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें पड़ोसी देशों से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों से नागरिकता के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

अभी नागरिकता संशोधन कानून, 2019 के नियम भी नहीं बने हैं, और गृह मंत्रालय की 28 मई की एक गजट अधिसूचना में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, जैन, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों से नागरिकता के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने लगे हैं, जो फिलहाल गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पंजाब के 13 जिलों में रह रहे हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने यह आरोप लगाया है कि एमएचए की अधिसूचना चोर दरवाज़े से सीएए को लागू करने का एक प्रयास है।

अनीस अहमद द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में यह आग्रह किया गया है कि इस अधिसूचना को असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार गैरकानूनी करार दिया जाए, क्योंकि यह नागरिकता कानून, 1955 की धारा 5 और 6 के तहत पंजीकरण करवा के नागरिकता प्राप्त करने से मुसलमानों को रोकता है। पीआईएल में विवादास्पद गज़ट अधिसूचना का जायज़ा लेने की भी मांग की गई है, क्योंकि इसे नागरिकता कानून, 1955 की धारा 5 और 6 के उल्लंघन में जारी किया गया है। साथ ही याचिका में केंद्र सरकार को नागरिकता कानून, 1955 की धारा 16 की आड़ में ‘सत्ता के कपटी प्रयोग’ से रोकने का भी आग्रह किया गया है।


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