कोटा के राजकीय पुस्तकालय ने हिन्दी लेखकों को सम्मानित कर, मनाया हिन्दी दिवस

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कोटा के राजकीय पुस्तकालय ने हिन्दी लेखकों को सम्मानित कर, मनाया हिन्दी दिवस

“वैश्विक परिदृश्य मे हिंदी का जनभाषा से विश्व भाषा तक की यात्रा” विषय पर “ राष्ट्रीय वर्चुअल एवं संभाग स्तरीय ऑफलाईन हिंदी सेवी विमर्श , डा. प्रभात द्वारा लिखित पुस्तक “ हमारा भारत हमारी शान” पुस्तक का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन ।

हिन्दी दिवस पर, राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा के द्वारा राष्ट्रीय वर्चुअल एवं संभाग स्तरीय ऑफलाईन राजभाषा हिंदी सेवी विमर्श का आयोजन हुआ I कार्यक्रम संयोजिका शशि जैन ने बताया कि राजभाषा हिंदी दिवस कार्यक्रम का आयोजन 2 सत्रों मे किया गया । प्रथम सत्र मे राष्ट्रीय वर्चुअल हिंदी सेवी विमर्श एवं द्वितीय सत्र मे ऑफलाईन हिंदी सेवी विमर्श , डा. प्रभात द्वारा लिखित पुस्तक “ हमारा भारत हमारी शान” पुस्तक का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । राष्ट्रीय वर्चुअल हिंदी सेवी विमर्श मे अध्यक्षता रजनीश यादव मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया अंचल छत्तीसगढ, मुख्य अतिथी सोमेन्द्र यादव मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) बैंक ऑफ बडौदा अंचल राजस्थान जयपुर , विशिष्ठ अतिथि निशा गुप्ता स्नातकोत्तर शिक्षिका जवाहर नवोदय विद्यालयमुरैना एवं डॉ मधु मीणा माध्यमिक शिक्षक गुना मध्यप्रदेश मुख्य उदबोधन डॉ लखन शर्मा शिक्षाविद एवं डॉ प्रितिमा व्यास रहे । ऑफलाईन राजभाषा हिंदी सेवी विमर्श मे अध्यक्षता डॉ प्रभात सिघल पुर्व संयुक्त निदेशक जनसम्पर्क राजस्थान, मुख्य अतिथी डॉ अनिता वर्मा प्रोफेसर हिंदी , विशिष्ठ अतिथि डॉ कृष्णा कुमारी “कमसीन” लेखक , कवि एवं राजकीय शिक्षिका एवं प्रतिनिधि काव्य पाठ प्रिति शर्मा का रहा । इस अवसर पर अन्य वक्ताओं मे चन्द्रशेखर सिंह सिसोदिया, गजेन्द्र सिंह शक्तावत पर्यटन प्रेमी एवं सत्यप्रीय पाठक शिक्षाविद रहे । इस अवसर पर रजनीश यादव मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया अंचल छत्तीसगढ एवं मुख्य अतिथी सोमेन्द्र यादव मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) बैंक ऑफ बडौदा अंचल राजस्थान जयपुर ने संयुक्त रुप से डॉ प्रभात सिंघल पुर्व संयुक्त निदेशक जन सम्पर्क राजस्थान सरकार के द्वारा लिखित पुस्तक “ हमारा भारत हमारी शान” का ऑनलाईन लोकार्पण किया और कहा कि – यह पुस्तक भारतीय कला , संस्क़ृति एवं पर्यटन से रुबरु कराने की दिशा मे एक सशक्त प्रयास है जो विभिन्न राज्यो की कला राष्ट्रीय वर्चुअल हिंदी सेवी विमर्श मे सर्वप्रथम डॉ० दीपक श्रीवास्तव मण्डल पुस्तकालयाध्यक्ष ने ऑनलाईन जुडे सभी आमंत्रित अतिथियो का परिचय करवाते हुये करते हुए हिन्दी भाषा की समृद्धि के लिये भाषा एवं पुस्तकालय विभाग राजस्थान सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासो एवं उत्थान योजनाओं से अवगत कराया । इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे रजनीश यादव ने कहा कि – राजाभाषा हिंदी समरसता , सोहार्द , सहिष्णुता एवं सामंजस्य की भाषा है । मुख्य अतिथी सोमेन्द्र यादव ने कहा कि – हिंदी हमारी जनभाषा राजभाषा, राष्ट्रभाषा एवं विश्वभाषा बन चुकी है क्योकि इस भाषा मे इसका सामर्थ मौजुद है । विशिष्ठ अतिथी निशा गुप्ता ने कहा है कि हिंदी का कुल देवनागरी है और संस्कृत इसकी माता है। राष्ट्रभाषा के गौरव के लिए हिंदी में ही तो सब कुछ समाता है। हिंदी अद्भुत भाषा है जो गागर में सागर को भरती है। शब्दों के अनूठे चमत्कार से नित्य नये इतिहास ये रचती है। हिंदी हमारी शान है। हिंदी भारत की पहचान है। हिंदी कवियों की भाषा है, और ये ही महाकाव्य की जान है। जितना ज्यादा संभव हो हमें हिंदी भाषा को ही प्रयोग में लाना है। इसके गौरव को बढ़ाना है। विशिष्ठ अतिथी डॉ मधु मीणा ने काव्य के माध्यम से कहा कि - हिंदी राजभाषा कहलाती,भाषा का सरताज हिंदी।सदा उज्जवलित अक्षुण्ण रहे,नित गर्वित हिंदी।भारत-भारती के मस्तक पर,शोभित चंदन हिंदी।आओ इसका मान बढ़ाएं,प्रयोग में लाएं हिंदी। रविन्द्र कुमार यादव स्नातकोतर शिक्षक हिंदी केन्द्रीय विधालय रॉयगढ ने कहा कि – हिंदी एक सम्रद्ध भाषा है और यह ह्रदय से निकलती है एवं ह्रदय को छुती है ।

ऑफलाईन राजभाषा हिंदी सेवी विमर्श को संबोधित करते हुये डॉ . अनिता वर्मा प्रोफेसर हिंदी ने कहा कि – हिंदी भाषा जहाँ अभी तक व्यावहारिक रूप से विश्व स्तर पर अपना वर्चस्व बनाये हुये हैं वहीं वर्तमान समय में डिजिटल संवेदना के पंख लगा कर वैश्विक से पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही है/तीव्रता से अग्रसर हो रही है। कोरोना काल में ढाणी से लेकर विश्व तक सम्पूर्ण मानव जाति की संवेदना, वेदना,चेतना, पीड़ा भाषा के माध्यम से एकाकार हो गई है, ये है भाषा का ही जादू है । कुछ चिकित्सीय शब्द जैसे मास्क, कोरोनटाइन, सेनिटाइजर आदि शब्दों ने मानव जाति को एक सूत्र में बांध दिया है।

ऑफलाईन राजभाषा हिंदी सेवी विमर्श को संबोधित करते हुये डॉ. कृष्णा कुमारी ने अपनी स्वरचित मुकतको के माध्यम से कहा कि – रम हैं आप यूँ अंत:करण में ,ब्रह्म जैसे व्याप्त हो वातावरण में।अपने इस परिणाम से परिचित था रावण,मोक्ष उसका है निहित सीताहरण में। आगे वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर कहा कि – शादी लायक हुआ है बेटा,अब होंगी व्यापार की बातें।भाई से भाई करता है, अब तो बस दीवार की बातें।

आज इस अवसर पर बोलते हुए, शिक्षाविद् सत्य प्रिय पाठक ने कहा, हिन्दी भाषा भारतीय संस्कृति के लिये प्राण वायु के समान है। ये संपूर्ण भारत को एक सूत्र में जोड़ती है। इसी क्रम में सेव ऑवर हेरिटेज फाउंडेशन कोटा से गजेन्द्र सिंह शक्तावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, युवा पीढ़ी को हिन्दी भाषा का शुध्द और त्रुटि रहित तरीके से प्रयोग करने के लिये हिन्दी व्याकरण का सही से ज्ञान होना जरुरी है। हिन्दी भाषा तो एक प्रवाहमान नदी की तरह है, जो विभिन्न सभ्यताओं को जोड़ने का कार्य कर रही है। इसी क्रम मे विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर अपने सम्बोधन में शिक्षक और हाडौति के टूरिस्ट गाईड़ चंद्र शेखर सिंह सिसौदिया ने कहा कि, “” हिन्दी एक सर्व व्यापक भाषा है। हम सभी भाषाओं का सम्मान करें, इस दुनिया को बेहतर तरीके से जानने-समझने के लिये अन्य भाषायें भी सीखें। साथ ही अपनी मातृभाषा हिन्दी का भी जीवन में सही और सहज व्यवहार करें। हमें हिन्दी भाषा पर गर्व होना चाहिये। देश की आजादी के संघर्ष में भी देशवासियों को एकजुट कर के स्वतंत्रता के लिये प्रेरित करने में हिन्दी भाषा के योगदान से सभी परिचित हैं” ।

इसके अन्तर्गत सरकारी स्तर पर “हिंदी सेवी पदक” से 07 हिन्दीसेवी विद्वानों डॉ .लखन शर्मा (ऑनलाईन) रजनीश यादव (ऑनलाईन) सोमेन्द्र यादव (ऑनलाईन) , निशा हुप्ता (ऑनलाईन) , मधु मीणा (ऑनलाईन) डॉ. अनिता वर्मा, डॉ. कृष्णा कुमारी “कमसीन”, राजभाषा हिंदी पदक से पुस्तकालय एवं सुचना विज्ञान के शोधार्थीयों को हिंदी मे शोध को बढावा देने के लिये डॉ प्रितिमा को दिया गया । गेस्ट ऑफ ऑनर डा प्रभात सिंघल को हिंदी भाषा मे लेखन के लिये प्रदान किया गया । हिंदी ब्लागर नासिर शाह सुफी को हिंदी ब्लाग को प्रोत्साहन देने के लिये हिंदी सेवी पदक से समानित किया गया । कार्यक्रम के अंत मे शशि जैन ने सभी अतिथियों का आभार जताया एवं अपनी स्वरचित रचना सुना सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया । कार्यक्रम का प्रबन्धन आयोजन श्री अजय सक्सेना एवं श्री नवनीत शर्मा द्वारा किया गया। सहयोग नासिर खान , रशीदन , देवी शंकर सोनी एवं आशा बाई का रहा ।


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