साउथ ने बॉलीवुड को पछाड़ा तो शाहरुख, अजय और अक्षय जैसे हीरो विमल बेचने लगे!
(प्राण खान उर्फ जीव खान ब्लॉग)

Sufi Ki Kalam Se

साउथ ने बॉलीवुड को पछाड़ा तो शाहरुख, अजय और अक्षय जैसे हीरो विमल बेचने लगे!
(प्राण खान उर्फ जीव खान ब्लॉग)

प्राण खान और मैं, खामोशी के साथ अखबार पढ़ने में लिप्त थे।
“कैसा ज़माना आ गया है! देश के बड़े बड़े स्टार, तंबाकू उत्पाद बेच रहे हैं वो भी एक नहीं बल्कि तीन तीन बड़े स्टार मिलकर तंबाकू खाने की सलाह दे रहे हैं। “
मैंने अखबार में शाहरुख, अजय और अक्षय कुमार वाले विमल के विज्ञापन को देखकर बड़बड़ाते हुए कहा।

मेरी बात सुनकर प्राण खान उर्फ जीव खान कहाँ चुप रहने वाले थे, वो मुँह में भरे तंबाकू की लुगदी को बचाते हुए थूक कर बोले,
” क्या करेंगे बेचारे, उनकी फिल्में तो चल नहीं रही है तो अब तंबाकू ही बेचेंगे। ‘

“क्या बात करते हो प्राण खान जी, इतने बड़े स्टार क्या कुछ फिल्में नहीं चलने से गरीब हो जाएंगे?’

कुछ नहीं जनाब, अब बहुत कुछ बदल चुका है। 2013 में आई बाहुबली ने जबरदस्त कमाई कर बॉलीवुड के इन सूरमाओं को सीधी चुनौती दे दी थी। उसके बाद बाहुबली 2, केजीएफ 1, फिर पुष्पा और अब आरआरआर और केजीएफ 2 जैसी फ़िल्मों की बम्पर कमाई ने इन हीरोज का कचूमर निकाल कर रख दिया है।’

“वो तो ठीक है प्राण खान जी, लेकिन मैं यहां केवल इतने बड़े सितारों के तंबाकू उत्पाद बेचने के विरोध में बात कर रहा हूं क्यूंकि इन्हें देश के करोड़ों युवा फॉलो करते हैं, उन पर क्या नकारात्मक असर नहीं होगा।’
मैंने प्राण खान को असल मुद्दे पर लाने की एक और कोशिश करते हुए कहा।

कोई खास असर नहीं होगा जी, आप ज्यादा परेशान ना हो! विमल या किसी भी तंबाकू का विज्ञापन शाहरुख करे या सलमान, बच्चन साहब करे या कोई आम आदमी या चाहे कोई ना भी करे तब भी ये उत्पाद उतने ही बिकेंगे…. (कहते कहते प्राण खान ने अपना तंबाकू थूकते हुए कहना जारी रखा).. थू थू… क्यूंकि तंबाकू बिकने की असल वजह ये विज्ञापन नहीं है बल्कि इनका उत्पादन होना है। अगर यह तंबाकू देश में बनेगा ही नहीं तो कोई खाएगा भी नहीं। अब मुझे ही देख लो… मेरे मुँह में विमल जब से है जब ये ये तीनों स्टार पैदा भी नहीं हुए थे तब आप केवल इनके ऊपर ही कैसे आरोप लगा सकते हैं? आरोप ही लगाना है तो सरकारों पर लगाइये जो मोटी रकम लेकर तंबाकू उत्पाद बनाने और बेचने की अनुमती देते हैं। “

प्राण खान का ये तार्किक उत्तर सुनकर मैं एक बार फिर से निरुत्तर हो गया।
नासिर शाह (सूफ़ी)


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