वर्ष वृतांत 2022, सूफ़ी की क़लम से …

Sufi Ki Kalam Se

वर्ष वृतांत
सूफ़ी की क़लम से …
ज़िंदगी के कई साल आये और गुजर गये ।हर साल, कई तरह के उतार चढ़ाव के साथ ,ज़िंदगी बेहद तेज गति से बढ़ती चली जा रही है । हर साल लिखा ,खूब लिखा , कई तरह की विधाओं में हाथ आज़माया लेकिन अब भी साहित्य की कई विधाएँ बाक़ी थी जिन पर अभी तक हाथ नहीं आजमाया था उनमें से एक है वर्ष वृतांत ।इस साल इस विधा में भी कुछ लिख ही दिया जो आपके पेश ए नज़र है ।

प्रस्तावना – साल 2021 से मैंने डायरी लिखना शुरू किया था जो 2022 में भी जारी रहा । नियमित रूप से डायरी लिखने पर वर्ष वृतांत लिखना काफ़ी आसान हो जाता है ।

यात्रायें
मेरी ज़िंदगी का ज़्यादातर हिस्सा सफ़र में ही गुजरता है ।शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब में सफ़र नहीं करता हूँ । मेरा ज्यातदार सफ़र जॉब की वजह से होता है जहां मुझे रोज़ाना स्कूल जाकर आना होता है इसके अलावा जब छुट्टी होती है तब भी मैं अपनी रुचि और काम के लिए सफ़र करता रहता हूँ ।
साल 2022 के 365 दिनों में से मैंने 270 दिन सफ़र किया , केवल 95 दिन ऐसे रहे जिसमें कोई सफ़र नहीं हुआ ।इस तरह साल के अंत तक कुल 18870 किमी सफ़र किया । ज़्यादातर सफ़र स्कूल के लिए इटावा (कोटा ) किया ।यूपी ,उत्तराखण्ड और राजस्थान में कुल मिलाकर दस हज़ार किमी यात्रा की । यात्रा का माध्यम बाइक ,बस ट्रेन और कार रही लेकिन ज्यादातर यात्रा बाइक से ही रही । इस साल लंबी यात्रा में केवल मसूरी ,हरिद्वार ,कलियर शरीफ (उत्तराखण्ड) और दिल्ली ही जा पाया बाक़ी यात्राये राजस्थान में ही रही ।

नमाज़
वैसे तो ये चीज बताने की नहीं हैं क्योंकि नमाज़ इस्लाम का एक अनिवार्य अंग है जिसे बिना दिखावे के हर मुसलमान को पढ़ना होता है लेकिन पहली बार मैंने नमाज़ का पूरा रिकॉर्ड लिखकर मैंटेन किया है और वर्ष वृतांत लिख रहा हूँ तो मैं समझता हूँ कि ये नमाज़ के रिकॉर्ड बिना अधूरा रहेगा ।
नमाज़ के लिहाज़ से यह साल मेरा अब तक सा सबसे महत्वपूर्ण साल रहा है जिसमें मैंने पूरे साल कि नमाज़े पढ़ी है हालाँकि सारी नमाज़ें समय पर नहीं पढ़ पाया लेकिन जैसे ही टाइम मिला मैंने इसी साल में छूटी हुई नमाजों की कजा कर साल की पूरी नमाज़े पढ़ने का सर्फ़ हासिल कर पाया । साल 2022 में कुल 1825 में से 985 नमाज़ वक़्त पर और 840 नमाजें वक्त के बाद कजा की । सबसे ज़्यादा कजा नमाज़ें फ़ज़्र की हुई जो साल में केवल 77 दिन ही वक्त पर पढ़ी बाक़ी 288 कजा की ।
ज़ुहर की 365 में से 170 वक्त पर बाक़ी 195 कजा की । नमाज़ ए असर 242 वक्त पर बाक़ी 123 कजा की ।मग़रीब वक्त पर 236 और 123 कजा तो ईशा 260 वक्त पर और 105 कजा की । इस तरह पूरे साल की 1825 नमाज़ें पढ़ने में कामयाब रहा । एक नियत (दृढ़ निश्चय) और पंचुलैटी के साथ में यह सब करना मुमकिन हो सका ।

साहित्य लेखन –
मेरा सबसे ख़ास शोक लेखन का रहा है लेकिन मैं ख़ुद मेरे आँकड़े देख कर हैरान हूँ ।365 दिन में से मैंने मात्र 100 दिन ही कुछ ना कुछ लिखा जो मेरा काफ़ी निराशाजनक प्रदर्शन था । लेखन के क्षेत्र में इस साल मैंने जो सबसे बड़ा काम किया वो एक नोवेल (ट्रीपल एस) का है जिसे मैंने 2022 के जून में लिखना शुरू किया था और दिसंबर तक पूरा किया था । नोवेल की वजह से इस साल काफ़ी कम आर्टिकल /ब्लॉग लिख पाया ।

सम्मान– इस साल का मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार संभाग स्तरीय था जो कोटा शहर में कर्मयोगी सेवा संस्थान द्वारा “शान ए हाड़ौती” के नाम से दिया गया । इस पुरस्कार के अलावा पत्रकारिता के क्षेत्र में मुझे नगर पालिका मांगरोल ,महात्मा गाँधी आदर्श ग्राम पंचायत सीसवाली , चैम्पियंस ट्रॉफी सीसवाली ,डे नाईट क्रिकेट प्रतियोगिता सुल्तानपुर आदि द्वारा वेब जर्नलिज़्म के लिए सम्मानित किया गया ।

एक दर्दनाक हादसा ,एक नयी ज़िंदगी –
ज़िंदगी में वैसे तो कई हादसे हुए लेकिन इस साल जो हुआ वो अब तक का सबसे ख़तरनाक हादसा था ।इतना भयंकर हादसा था जिससे बचना लगभग नामुमकिन था लेकिन मेरे रब का ,मेरे अल्लाह का ऐसा मोज़ज़ा (चमत्कार) रहा कि की इतने बड़े कार एक्सीडेंट के बाद भी ना सिर्फ़ में बल्कि मेरे साथ पूरा परिवार बच गया । 28 अगस्त को सांगोद के पास हुए हादसे के बाद मुझे नयी ज़िंदगी मिली जिसके लिए मेरे रब का शूरकगुज़ार हूँ ।

न्यू क्रिएटिविटी
1- समसामयिक मुद्दों पर हास्यात्मक तरीक़े से शोर्ट ब्लॉग लिखने के लिए मैंने प्राण ख़ान उर्फ़ जीव ख़ान नामक काल्पनिक पात्र तैयार कर ब्लॉग लिखना शुरू किया लेकिन दूसरे कामों में व्यस्त रहने की वजह से मैं नाममात्र ब्लॉग ही लिख पाया और इस साल मैं प्राण ख़ान के नाम को कोई ख़ास पहचान नहीं दिला पाया । इंशाअल्लाह 2023 में इस पर ज़्यादा काम करूँगा।
2- यूट्यूब के लिए पहली बार कई प्रोग्राम लाइव किए, रिकॉर्ड किए और इंटरव्यूज़ भी किए । चैनल भले ही पुराना था लेकिन यह सब नये नये काम मैंने इसी साल अंजाम तक पहुँचाए । मात्र 250 सब्सक्राइबर से दुबारा शुरू किए चैनल को साल के अंत तक 1400 से ज़्यादा सब्सक्राइब मिले जिसके लिये सभी दर्शकों का आभारी हूँ हालाँकि 4000 घंटों के वॉच टाइम से अभी काफ़ी दूर हूँ जिसे इस साल पूरा करने की कोशिश जारी रहेगी। अपने चैनल के लिए स्पेशल शो करने का काम इस साल नहीं कर पाया जो भी इंशाल्लाह इस नये साल में आप सबके सहयोग से करूँगा ।
3- स्कूल में इतिहास व्याख्याता पद रिक्त होने पर पहली बार स्कूल में 11 वीं और 12वीं कक्षा को इतिहास पढ़ाया हालाँकि इससे पूर्व बीएसटीसी और बीएड के छात्रों को इतिहास पढ़ा चुका था लेकिन स्कूल में इतिहास पढ़ाने का यह पहला अवसर था । इसके अलावा मैंने इसी स्कूल में लाइब्रेरी के रिनोवेशन को लेकर भी एक प्रयोग किया जो सफल भी रहा।

स्टडी – मैंने इस साल सबसे ज़्यादा
किताबें पढ़ी ।औसतन हर माह कम से कम एक किताब पढ़ी और पहली बार अनगिनत ऑडियो बुक भी सुनी । इस साल में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से लगभग पच्चीस से ज़्यादा साहित्यिक किताबें पढ़ चुका हूँ ।

स्कूल लाइफ – जनवरी से लेकर जुलाई तक अपने पुराने विद्यालय खेड़लीं बोरदा (ख्यावदा) रहा उसके बाद इटावा शहर के महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में आ गया ।

क्या खोया ,क्या पाया
ख़तरनाक कार हादसे में दुबारा से एक नयी जिंदगी पाई लेकिन अपनी प्यारी कार होंडा अमेज़ को खो दिया जिसने हम सबकी जान बचाई थी । एक्सीडेंट में वह इतनी क्षतिग्रस्त हो गई थी कि बीमा कंपनी वालों ने उसको टोटल लोस कर बीमा वैल्यू की राशि का भुगतान कर दिया ।
पहली बार पूरे साल की नमाज़ें पढ़ने में कामयाब रहा लेकिन सारी नमाज़ें वक्त पर नहीं पढ़ने का अफ़सोस रहा ।
यूट्यूब पर 1200 से ज़्यादा सब्सक्राइबर मिले लेकिन 4000 घंटे का वॉच टाइम पूरा ना होने की वजह से चैनल मोनेटाइज़ नहीं हो पाया।
डिजिटल क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कई उपकरण ख़रीदे जिनमे से ज़्यादातर अनुपयोगी साबित हुए ।साल में दो किताबें प्रकाशित होने का प्लान था लेकिन एक भी नहीं हो पाई हालाँकि एक किताब (नावेल ) लिखने काम पूरा हो गया है जो नये साल के शुरुआत में प्रकाशित हो सकती है।
नासिर शाह (सूफ़ी)


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