नमाजी कुछ दिन के
नखरे साल भर के (प्राण खान ब्लॉग)

Sufi Ki Kalam Se

नमाजी कुछ दिन के
नखरे साल भर के
‘यार ये क्या तरीका है! इतने गरम पानी से वुजू कैसे बनाएंगे? इतनी बड़ी मस्जिद में ठंडा पानी का इंतजाम भी नहीं है क्या?’
प्राण खान ने नल की टोंटी चालू करते हुए कहा। उनकी इस हरकत से आसपास के नमाज़ी उन्हें देखने लगे लेकिन किसी ने कोई ज़वाब नहीं दिया।
गरम पानी से जैसे तैसे वुजू करके प्राण खान उर्फ जीव खान मस्जिद के अंदर दाखिल हुए और इधर उधर नजरे दौड़ाई। मस्जिद में दोनों और सिर्फ दो कूलर थे। प्राण खान कूलर की तरफ बढ़ते हुए बड़बड़ाते रहे, इतने सारे आदमियों पर केवल दो कूलर रखे हुए हैं। ‘
जैसे ही कूलर के सामने पहुँचे बिजली चली गई।
“अब क्या हुआ है, ये कूलर कैसे बंद हो गया है?’
प्राण खान जोर से चिल्लाए।
‘लाइट चली गई है ‘
एक लड़के ने कहा।
‘तो क्या मस्जिद में इनवर्टर भी नहीं है?’
प्राण खान ने लड़के से सवाल किया। लड़के के पास कोई जवाब नहीं था उसने अपने कंधे उचका दिए। बाकी के नमाज़ी प्राण खान को घूरने लगे।
प्राण खान हर चीज में नुक्ता चीनी करते हुए नमाज़ से फारिग हुए और घर के लिए रवाना होने लगे तभी
एक बुजुर्ग ने बड़े ही संजीदा अंदाज में उनसे कहा , ” प्राण खान जी आप पिछली दफा के रमजान के ठीक एक साल बाद यहां आए हों। पिछली बार भी आपने यही सब नखरे दिखाए थे और आपकी शिकायतों और मस्जिद की दूसरी जरूरयात को पूरा करने के लिए हमने मस्जिद के लिए चंदा शुरू किया था, तब आपने केवल सो रुपये दिए थे और आपके जैसे कुछ दिनों के जितने नमाज़ी थे उन्होंने भी सो या पचास ही दिए थे। तो अब आप बताये कि सो पचास रुपये के चंदे में इनवर्टर लगाए या कूलर बढ़ाए, या ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर लगाए? “
ठीक है ठीक है, मुझे आपसे कोई बहस नहीं करनी है”
बुजुर्ग की बात से पल्ला झाड़ते हुए प्राण खान जी मस्जिद से बाहर आ गए ताकि और शर्मिंदा ना होना पड़े।


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