कई महोत्सव तो कहीं अभिशाप साबित हुई रीट परीक्षा

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कई महोत्सव तो कहीं अभिशाप साबित हुई रीट परीक्षा

राजस्थान की सबसे बड़ी और बहुचर्चित रीट परीक्षा आखिरकार संपन्न हो गयी। तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा के चयन हेतु ली जाने वाली यह परीक्षा हर सरकार के कार्यकाल में चर्चा में रहती है और इसकी सफ़लता और असफलता पर सरकार की बनने बिगड़ने के भी कयास लगाए जा सकते हैं।
26 सितंबर को राजस्थान के समस्त जिलों में आयोजित होने वाली रीट परीक्षा पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया के समस्त प्लैटफॉर्म की शान बनी हुई थी। रीट परीक्षा से सम्बन्धित लाखो मजाकिया पोस्ट इन्टरनेट पर वाइरल थी और क्यों न हो, अखिरकार राजस्थान का सबसे बड़ा महोत्सव जो था।

रीट परीक्षा में झलकी राजस्थान की संस्कृति:-
राजस्थान राज्य ‘पधारों म्हारे देश’ के आदर्श वाक्य के साथ पूरी दुनिया में हमेशा अतिथियों के सत्कार के लिए जाना जाता है तो फिर अपने ही राज्य के निवासियों के लिए कैसे पीछे रह सकता था। जैसे रीट परीक्षा का नजदीक आई, तबसे ही राजस्थानी लोग रीट अभ्यर्थियों की सेवा के लिए उमड़ पड़े। कोई व्यक्तिगत तो कोई विभिन्न सामाजिक संगठनों के जरिए छात्र छात्राओं की मदद कर रहे थे। सेवा का आलम यह था कि लोगों के रहने खाने के साथ साथ लाने ले जाने एंव अन्य इंतज़ाम तक बेहतरीन थे। शायद यह पहला अवसर था जब राजस्थान में किसी एक परीक्षा के लिए इतना सेवा भाव देखने को मिला। जिन कस्बों और शहरों में रीट परीक्षा का सेंटर था, वहाँ पर सामाजिक कार्यकर्ता पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात थे, कई जगह तो ये आलम था कि परीक्षार्थी कम और मददगार ज्यादा थे।

कई अभ्यर्थियों के लिए अभिशाप भी :-
जहां हर काम इतने बेहतर तरीके से हुआ, वही कुछ खामियों ने इतने बड़े आयोजन पर धब्बा लगाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। बारां जिले के छह अभ्यर्थियों का अचानक अकाल मृत्यु का ग्रास हो जाना इस परीक्षा की सबसे बड़ी क्षति है। इसके अलावा कुछ सेंटर पर देरी होने के कारण महिला परीक्षार्थियों को परीक्षा से वंचित कर देने वाले दृश्य भी बड़े हृदय विदारक रहे हैं। कोटा जिले में एक महिला को केवल उसके धार्मिक पहनावे (बुर्का) पर परीक्षा से बाहर कर देना भी सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। पूरे राज्य में इतने पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के बाद भी कई जगह पेपर आउट होने और नकल का होना विभाग और सरकार की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा करता है।

सरकार की वाहवाही :-
कुछ खामियों को छोड़ दिया जाए तो रीट परीक्षा का शानदार और सफल आयोजन रहा है मग़र राज्य सरकार द्वारा परीक्षार्थियों के लिए की गई निःशुल्क बस सेवा अच्छी-खासी चर्चा में रही। अभ्यर्थियों के लिए ना सिर्फ रोडवेज बसों में बल्कि निजी बसों में भी निःशुल्क यात्रा का फैसला सराहनीय रहा इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा समस्त ज़िलों के समस्त विभागों को इस परीक्षा को लेकर विभिन्न दिशा निर्देश देकर परीक्षा को सफल बनाने के लिए पाबंद करना भी इस महोत्सव की कामयाबी का कारण रहा है। रीट के सफल आयोजन के लिए विभिन्न समाचार पत्रों ने अपनी अपनी जांच पड़ताल के अनुसार सरकार को इस तरह की उत्तम व्यवस्था करने पर पीठ भी थपथपाई है।

शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारियों ने किया शर्मशार :-
राजस्थान का शिक्षा विभाग, अपने कर्मचारियों के बलबूते पर सम्पूर्ण देश में अपने नवाचार और आधुनिक कार्यशैली के कारण विशिष्ट पहचान रखता है लेकिन कुछ बेईमान और लालची कर्मचरियों के कारण शिक्षा विभाग जैसी पवित्र संस्था को भी शर्मशार होना पड़ा है, यद्यपि शिक्षा विभाग ने बिना विलंब किए आरोपियों और संदिग्ध कर्माचारियों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए निलंबित कर जांच शुरू कर दी है।

पेपर के स्तर ने किया सबका मन हल्का :- तीन साल बाद आयोजित हो रही रीट परीक्षा में औसत दर्जे के पेपर ने लेवल प्रथम और द्वितीय के अभ्यर्थियों को काफी राहत प्रदान की है। मोटे मोटे विश्लेषण के मुताबिक दोनों स्तरों में तैयारी करने वाले छात्रों के 115 से लेकर 140 तक अंक आ रहे हैं लेकिन दोनों स्तरों के लिए अलग अलग पदों की संख्या एंव विषयों का वर्गीकरण नहीं होने के कारण कट ऑफ का अंदाजा लगा पाना काफी मुश्किल है।

नासिर (सूफ़ी)


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