ग़लतफ़हमी दूर करें: कुरान में जिहाद का अर्थ बेकसूर लोगों का कत्ल करना नहीं है- राजीव शर्मा

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क्या कुरान में जिहाद का अर्थ गैर-मुस्लिमों को मारना बताया गया है?

ग़लतफ़हमी दूर करें: कुरान में जिहाद का अर्थ बेकसूर लोगों का कत्ल करना नहीं है- राजीव शर्मा
(गेस्ट ब्लॉगर राजीव शर्मा)
भाग 1 एंव भाग 2

यह एक वास्तविकता है कि क़ुरआन की शिक्षाओं में एक शिक्षा वह है जिसको जिहाद कहा जाता है। परंतु जिहाद शांतिपूर्ण प्रयास का नाम है, न कि किसी तरह की हिंसात्मक कार्रवाई का। क़ुरआन में बताई गई जिहाद की धारणा क़ुरआन की इस आयत से स्पष्ट है।

यह एक वास्तविकता है कि क़ुरआन की शिक्षाओं में एक शिक्षा वह है जिसको जिहाद कहा जाता है। परंतु जिहाद शांतिपूर्ण प्रयास का नाम है, न कि किसी तरह की हिंसात्मक कार्रवाई का। क़ुरआन में बताई गई जिहाद की धारणा क़ुरआन की इस आयत से ज्ञात होती है: ‘और इसके (क़ुरआन) माध्यम से तुम उनके साथ बड़ा जिहाद करो।’ (25/52)

क़ुरआन की इस आयत में, क़ुरआन के माध्यम से जिहाद करने की शिक्षा दी गई है। स्पष्ट है कि क़ुरआन कोई हथियार नहीं, क़ुरआन एक वैचारिक पुस्तक है। क़ुरआन अल्लाह की आइडियोलॉजी (विचारधारा) का परिचय है।

इससे क़ुरआन में बताई गई जिहाद की धारणा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। क़ुरआन के अनुसार, जिहाद वास्तव में शांतिपूर्ण वैचारिक संघर्ष का नाम है। इस वैचारिक संघर्ष का लक्ष्य क़ुरआन में यह बताया गया है कि क़ुरआन का शांतिपूर्ण संदेश लोगों के दिलों में उतर जाए। (4/63)

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इस आयत के अनुसार, क़ुरआन का वांछित कथन वह है जो क़ौल-ए-बलीग़ (बोधगम्य कथन) हो, अर्थात् ऐसी वाणी जो लोगों के मन को संबोधित करे, जो लोगों को संतुष्ट करने वाली हो, जिसके माध्यम से लोगों को क़ुरआन की सच्चाई पर विश्वास पैदा हो, जिसके माध्यम से लोगों के अंदर वैचारिक क्रांति उत्पन्न हो जाए। यह क़ुरआन का मिशन है।

और इस प्रकार का वैचारिक मिशन मात्र तर्कों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। हिंसा अथवा किसी भी सशस्त्र कार्रवाई के माध्यम से इस लक्ष्य को पाना संभव नहीं।

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यह सही है कि क़ुरआन में कुछ ऐसी आयतें हैं जो क़िताल (युद्ध) की अनुमति देती हैं, परंतु ये आयतें मात्र युद्ध स्थिति के लिए हैं, वे मात्र आक्रमण के समय बचाव के अर्थ में हैं। रक्षात्मक युद्ध के अतिरिक्त, कोई युद्ध इस्लाम में वैध नहीं है। राज्य के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति, अथवा संगठन को जिहाद छेड़ने की अनुमति नहीं है।

क़ुरआन के अनुसार जिहाद क्या है? इस सवाल को लेकर कई ग़लतफ़हमियां फैलाई जाती हैं और इस शब्द के मनमाने अर्थ भी​ निकाले जाते हैं। इस पर मैं कुछ लिखने वाला था कि आज क़ुरआन के हिंदी अनुवाद के शुरुआती पृष्ठों में यह सामग्री मिल गई। इसके लेखक मौलाना वहीदुद्दीन खां साहब हैं। आप पद्म विभूषण सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं। जिहाद का इतना आसान विश्लेषण और क्या हो सकता है, “अगर जिहाद का अर्थ ‘हत्या’ होता तो सबसे पहले उनकी हत्या की जाती जिन्होंने पैग़ंबर (ﷺ) को सताया था।’

ग़लतफ़हमी दूर करें: Quran में जिहाद का अर्थ बेकसूर लोगों का कत्ल करना नहीं है।
जिहाद का अर्थ मन को शुद्ध करते हुए खुद की बुराइयों से लड़ना है
(गेस्ट ब्लॉगर राजीव शर्मा)भाग 2

क़ुरआन के माध्यम से जो लोग सच्चाई की खोज करें, उनके व्यावहारिक कार्यक्रम का दूसरा भाग वह है जिसको क़ुरआन में अल्लाह की ओर से आवाहन कहा गया है, अर्थात् आसमानी सच्चाई से दूसरों को अवगत कराना।
क़ुरआन के माध्यम से जो लोग सच्चाई की खोज करें, उनके व्यावहारिक कार्यक्रम का दूसरा भाग वह है जिसको क़ुरआन में अल्लाह की ओर से आवाहन कहा गया है, अर्थात् आसमानी सच्चाई से दूसरों को अवगत कराना।

यह आवाहन प्रक्रिया एक अत्यंत गंभीर प्रक्रिया है। यह पूर्ण डेडिकेशन (dedication) चाहता है। इसी पहलू से इसको जिहाद भी कहा गया है।

क़ुरआन के अनुसार, जिहाद पूर्ण रूप से एक अराजनीतिक (non political) प्रक्रिया है। आवाहक जिहाद का लक्ष्य मनुष्य के दिल को और उसके मन को बदलना है। और दिल व मन में परिवर्तन मात्र शांतिपूर्ण प्रचार के माध्यम से होता है, न कि किसी तरह के बलात् अथवा हिंसात्मक कार्य के माध्यम से।

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क़ुरआन का वांछित मनुष्य दिव्य मनुष्य (3/79) है, अर्थात् वह मनुष्य जो इस संसार में ख़ुदा वाला मनुष्य बने, जो पालनहार की ओर एकाग्र रहकर जीवन व्यतीत करे।

पालनहार का पसंदीदा मनुष्य बनने की इस प्रक्रिया को क़ुरआन में तज़्किय: (शुद्धीकरण) (2/129) कहा गया है। क़ुरआन के अनुसार, जन्नत उन्हीं व्यक्तियों के लिए है जो इस संसार में अपना शुद्धीकरण करें, जो मुज़क्का (शुद्ध) मनुष्य बनकर अगले जीवन में प्रवेश करें। (ता.हा.:76)

क़ुरआन के अनुसार जिहाद क्या है? इस सवाल को लेकर कई ग़लतफ़हमियां फैलाई जाती हैं और इस शब्द के मनमाने अर्थ भी निकाले जाते हैं। इस पर मैं कुछ लिखने वाला था कि आज क़ुरआन के हिंदी अनुवाद के शुरुआती पृष्ठों में यह सामग्री मिल गई। इसके लेखक मौलाना वहीदुद्दीन खां साहब हैं। आप पद्म विभूषण सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं। जिहाद का इतना आसान विश्लेषण और क्या हो सकता है! बाकी बातें अगले भाग में…ग

गेस्ट ब्लॉगर राजीव शर्मा प्रसिद्ध मारवाड़ी लेखक राजस्थान

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