‘हम्द’ गेस्ट पॉएट में पढ़िए मागंरोल के रईस अहमद की नई हम्द

Sufi Ki Kalam Se

हम्द

हो मेरा काम हर शुरू तेरे नाम से
मुझको रगबत हो बस तेरे इस्लाम से

छोड़ दू हर वो राह जो गाफिल करे
हो मुहब्बत सदा तेरे अहकाम से

तू मुझे दूर रखना हर बुरे काम से
यानी हश्र ओ कियामत के अंजाम से

जो हुए है गुनाह माफ कर ऐ खुदा
पाक मुझको तू रख झूटे इल्जाम से

हो सदा जिक्र तेरा लबो पर मेरे
हो मयस्सर सुकू इक तेरे नाम से

हो तलब बस इल्म ए दीं ही की अब
हो मुझे निस्बत उल्मा ओ इमाम से

गेस्ट पॉएट रईस अहमद मागंरोल


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