महिला दिवस विशेष कविता (रश्मि नामदेव)

Sufi Ki Kalam Se

महिला दिवस

रिश्तों की डोर है नारी,
त्याग की प्रतिमूर्ति है नारी,
घर का मान है नारी,
पति का स्वाभिमान है नारी,

नारी रूप अनेक,
मां ,बहन ,बेटी, पत्नी ,
हर रूप में प्यारी है, नारी

शिव की शक्ति है ,नारी
नर में नारायणी है, नारी
सीता- राम ,राधे -श्याम
नर से पहले है ,नारी

घर आंगन की खनक है ,नारी
ममत्व रूप में सबसे प्यारी है, नारी

जिसने सृष्टि को जन्म दिया ,
नवअंकुर को पोषित किया,
वह अन्नपूर्णा बन,
घर आंगन को महकाती है,

वह निर्मला सीतारमण ,
इंदिरा, द्रौपदी मुर्मू जैसी
सशक्त महिला बन देश को चलाती है,

देश की सीमा पर प्रहरी बन ,
देश की रक्षा को तैयार है,

फिर भी छोटी सोच का ग्रास बन,
कोख में ही मार दी जाती है,

कल्पना चावला ,
सुनीता विलियम्स जैसी
सशक्त नारी इस देश की शान है ,
यह नारियां ही इस देश की पहचान है,

रश्मि नामदेव शारीरिक शिक्षिका शिक्षक एवं सेल्फ डिफेंस मास्टर ट्रेनर, कोटा ,राजस्थान


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