अब बच्चे पढ़ेंगे, स्माइल 3.0 के माध्यम से

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स्माइल 3.0
भारत में कोरोना की दूसरी लहर समाप्त हो चुकी है और विशेषज्ञों ने तीसरी लहर आने के संकेत देकर देशवासियों को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब तीसरी लहर कब आएगी या आयेगी भी या नहीं, यह कहना तो मुश्किल है लेकिन सरकार ने इससे बचने के लिए तीसरे चरण की तैयारी शुरू कर दी है। देश के हर राज्य में, हर विभाग अपने अपने स्तर पर तैयारी कर रहा है तो फिर राजस्थान का शिक्षा विभाग कैसे पीछे रह सकता है।
राजस्थान में गत वर्ष में स्माइल नामक, शिक्षा का प्रोजेक्ट शुरू कर बच्चों को ऑनलाइन एजुकेशन से जोड़ने की कोशिश की गई, जिसमें बच्चों सहित शिक्षकों एंव अभिभावकों को भी काफी परेशानीयों का सामना तो करना पड़ा लेकिन बच्चों को शिक्षा से जुड़े रहने मे काफी हद तक सफलता भी प्राप्त हुई। अब चूँकि एक बार फिर से कोरोना महामारी से प्रभावित तीसरा शिक्षण सत्र शुरू हो रहा है तो ऐसे में एक बार फिर से स्माइल प्रोजेक्ट का सहारा लेना स्वाभाविक है। स्माइल 1.0 और 2.0 के बाद नए शिक्षण सत्र (2021-22) के लिए राजस्थान सरकार द्वारा राज्य में स्माइल 3.0 प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है।


क्या है स्माइल 3.0 :-
इस प्रोजेक्ट के तहत हर दिन सुबह 8 बजे स्टडी मैटेरियल को टीचर्स द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप पर अपलोड करना होगा। इसके बाद स्टूडेंट्स की ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ प्रत्येक सप्ताह क्विज के आधार पर मार्किंग की जाएगी। अगस्त के अंत तक बेस्ट सात क्विज के आधार पर स्टूडेंट्स का आकलन होगा। जो कि प्रथम परख होगा।
ऑनलाइन होमवर्क देने के अलावा भी जो विद्यार्थी ऑनलाइन नहीं जुड़े हुए हैं, पूर्व की भांति ही शिक्षकों को उनके घर जाना होगा और उन्हें होमवर्क देना होगा और साथ ही उनकी समस्याओं का निदान भी करना होगा। जो विद्यार्थी सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं उन्हें वाट्स अप ग्रुप के माध्यम से ऑनलाइन होमवर्क दिया जाएगा जिसे विद्यार्थी चाहे तो ऑनलाइन ही सबमिट भी कर सकता है। यानी स्माइल 3.0 के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अध्ययन से जुड़ा जा सकता है। इसके बाद शिक्षक, छात्रों के किये कार्यो को जांच कर प्रत्येक विद्यार्थी की एक पोर्टफोलियो फाइल तैयार करेंगे जिसमें विद्यार्थी का समस्त डाटा सुरक्षित होगा, जो बाद में उनके मूल्यांकन का आधार बनेगा।

विद्यार्थी कैसे जुड़े स्माइल प्रोजेक्ट से?
जिन विद्यार्थियों ने पहले इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं लिया था उनकी कक्षा कर्मोन्नति तो हो चुकी है लेकिन सीखने मे वह काफी पीछे रह गए हैं, ऐसे में लगातार तीसरे साल भी वह विद्यार्थी अगर इस प्रोजेक्ट में सक्रिय भूमिका नहीं निभायेंगे तो उन्हें अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए समस्त छात्रों को स्माइल 3.0 प्रोजेक्ट से जुड़कर, सक्रिय भूमिका निभाने की महती आवश्यकता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वह नियमित रूप से होमवर्क करे, समस्या होने पर उन्हें शिक्षको से पूछे, (फोन/प्रत्यक्ष रूप से) और उन्हें दिशा निर्देश के मुताबिक अपने शिक्षको के पास जमा करवाये।

अभिभावक कैसे जिम्मेदारी उठाए :-
आम तौर पर अभिभावकों को यह कहते हुए सुना जा सकता है है कि स्कूल नहीं खुल रहे हैं और बच्चों का काफी नुकसान हो रहा है। उनकी इस बात से पूर्णतया सहमत नहीं हुआ जा सकता है क्योंकि बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्य जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। बल्कि अभिभावकों को यह समझने की आवश्यकता है कि आज के दौर में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ना उनके लिए हितकारी साबित होगा। स्माइल प्रोजेक्ट के माध्यम से भले ही सम्पूर्ण शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता लेकिन काफी हद तक बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें लाभान्वित किया जा सकता है। अतः अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों के विधालय शिक्षकों से, नियमित रूप से सम्पर्क में रहे और स्माइल 3.0 प्रोजेक्ट का अध्ययन कर इसे सफल बनाने में अध्यापकों का सहयोग करे। वह अपने बच्चों को सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित करे और उन्हें ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ने मे अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे।

स्माइल 3.0 टाईम टेबल :-
1-प्रत्येक सोमवार को कक्षा 1 से 5 के लिए स्माइल संदेश के साथ होमवर्क वर्कशीट साझा की जाएगी ।
( सप्ताह में एक बार )

2- प्रत्येक सोमवार और बुधवार को कक्षा 6 से 12 के लिए स्माइल संदेश के साथ होमवर्क वर्कशीट साझा की जाएगी । ( सप्ताह में दो बार )

3- यह होमवर्क वर्कशीट उस सप्ताह साझा की गई डिजिटल सामग्री पर आधारित होंगी ।

4- जहां भी संभव हो , इन कार्यपत्रकों / वर्कशीट्स को विद्यार्थी के साथ डिजिटल रूप से ( व्हाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से ) साझा किया जाना हैं ।

5- शिक्षकों को विद्यार्थियों द्वारा भरी गई वर्कशीट्स को व्हाट्सऐप ग्रुप्स से एकत्र करना हैं और उन्हें स्कूल में बनाए गए विद्यार्थी पोर्टफोलियो में रखना हैं ।

6- जिन विद्यार्थियों के पास डिजिटल पहुँच नहीं है , शिक्षकों को विद्यार्थी के घर विजिट के समय वर्कशीट को भी प्रिंट करके विद्यार्थियों को वितरित करना है तथा अगली विजिट में , शिक्षकों को वह वर्कशीट ( जो विद्यार्थियों ने भरी हैं ) एकत्र करनी हैं और उन्हें स्कूल में बनाए गए विद्यार्थी पोर्टफोलियो में रखना हैं ।नासिर शाह (सूफ़ी)

– नासिर शाह (सूफ़ी)


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