शोध संस्मरण

Sufi Ki Kalam Se

शोध संस्मरण (कोटा डाइट 14,15 16 नवंबर)

अत्यधिक भीड़भाड़ वाले कोटा शहर में ,रावतभाटा रोड पर ,चारों तरफ़ सड़कों से घिरे डाइट परिसर में तीन दिवसीय (14,15 ,16 नवंबर) एक्शन रिसर्च प्रशिक्षण का आयोजन हुआ । प्रशिक्षण को लेकर सभी शिक्षकों में काफ़ी उत्सुकता थी हालाँकि कई शिक्षक जो सिर्फ़ उपस्थिति के लिये आये थे वो इस प्रशिक्षण को लेकर इतने गंभीर नहीं थे क्योंकि उन्हें सिर्फ़ कुछ दिन कोटा शहर में रुक कर हाज़िरी देनी थी । बहरहाल ऐसे कम ही थे ।ज़्यादातर शिक्षकों ने तल्लीनता के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया था ।
प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर श्री संजय जी जैन और श्रीमती ममता शर्मा मैडम ने काफ़ी मेहनत कर अपनी पूर्ण योग्यता के साथ शोध जैसे उपयोगी किंतु जटिल विषय को बखूबी समझाया। संजय सर ने शोध के साथ साथ एबीएल जैसे संसाधनों के माध्यमों से शिक्षा को रुचिकर बनाने के अपने प्रयोग भी साझा किए तो वही ममता मैडम ने अपने शोध के टॉपिक के साथ साथ योगा जैसे महत्वपूर्ण एंव उपयोगी जानकारी देते हुए एक्टिविटीज़ भी करवाई। दोनों ट्रेनर का वर्क अपने अपने स्तर पर बेहतर था लेकिन अगर कुछ कमी की भी बात की जाये तो दोनों ट्रेनर में आपसी सहयोग की कमी भी दिखाई दी ।
प्रशिक्षण के पहले ही दिन डाइट प्राचार्या श्रीमती चारू जी सोनी का प्रेरणादायक उद्बोधन यादगार था लेकिन उनका राजनीतिक दृष्टिकोण एक तरफ़ा था , उनके उद्बोधन में केंद्र सरकार का काम सराहनीय था जबकि राज्य सरकार का काम नगण्य था हालाँकि इस उम्र में भी समसामयिक मुद्दों और आधुनिक पद्धति वाली शिक्षा पर उनकी जानकारी अद्भुत थी ।
कोटा डाइट में हर तरह की सुविधा उपलब्ध थी सिवाय खाने पीने के । कोटा शहर से सो किलोमीटर से भी अधिक दूर से आने वाले शिक्षकों को भी केवल एक कचौरी में संतुष्ट होना पड़ा। एक कचौड़ी को दो चाय के बीच लपेटकर दिन भर निकालना काफ़ी चुनौतीपूर्ण था ।अब ये अव्यवस्था डाइट की तरफ़ से थी या उच्च स्तरीय ,कहना मुश्किल है ।
प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभी शिक्षकों ने अपने अपने शोध के टॉपिक जमा करवाए । अंतिम दिन मुझे घर कर आवश्यक कार्य आ जाने की वज़ह से मैं अपना काम ज़मा करवा कर दो बजे बाद घर आ गया था इसलिए समापन के अंतिम पलों में अपनी बात नहीं कह पाया लेकिन हम तो पत्रकार लोग है अपनी बात किसी ना किसी तरह लोगो तक पहुँचा ही देते है । प्रशिक्षण में शामिल अधिकांश शिक्षक एक दूसरे से परिचित थे। प्रशिक्षण के पहले दिन शिक्षकों,प्रशिक्षकों और ट्रेनिंग के विषयों का परिचय हुआ । दूसरे दिन शोध के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए एक्शन रिसर्च को गहराई से समझाते हुए शिक्षकों को एक एक विषय चुनकर एक्शन रिसर्च असाइनमेंट बनाने का काम दिया गया । तीसरे और अंतिम दिन समस्याओं का समाधान करते हुए शिक्षकों के प्रोजेक्ट ज़मा किए गए तथा साथ ही समापन भी किया गया । यह प्रशिक्षण कोटा डाइट के आईएफ़आईसी विभाग के अन्तर्गत हुआ था जिसकी प्रमुख श्रीमती गायत्री गालव है । श्रीमती गालव की कोई क्लास तो नहीं थी लेकिन उनका व्यवहार अति उत्तम था ।उन्होंने प्रशिक्षण में आ रही समस्त छोटी बड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया ।
– नासिर शाह (सूफ़ी)
शिक्षक ,लेखक, पत्रकार


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3 thoughts on “शोध संस्मरण

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