नए दौर के बाइक राइडर (गेस्ट ब्लॉगर हैदर अली अंसारी )

Sufi Ki Kalam Se

नए दौर के बाइक राइडर
यह नया दौर हे नए नए संसाधन लोगो को प्राप्त हे टेक्नोलोजी का यह दौर लोगो के लिए समय समय पर जिंदगी में आने वाली परेशानियों की बनिस्बत नए नए संसाधन, नई नई सुविधाएं इजाद समने आती हे
कहते है आवश्यता ही अविष्कार की जननी है इंसान के सामने जैसे जैसे आवश्यताएं पैदा होती जाती है उसी अनुसार संसाधन भी पैदा होते हे
आज के दौर में ऐसी ही कहानी दो पहिया वाहन की हे जो आज हर घर परिवार की सख़्त ज़रूरत है पहले एक छोटे से क्षेत्र में सिमटी हुई बस्तियां हुआ करती थीं आज बड़े बड़े शहर कई किलोमीटर एरिया में फैले हुए हे और लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से जल्द से जल्द पहुंचने के लिए बाइक स्कूटी का इस्तमाल करते हे साईकिल का प्रयोग तो अब बहुत ही कम हो गया है कोई सोचता तक भी नही आज के दौर के बच्चो की सोच ही बाइक से शुरू होती हे क्यूं की आज के दौर के बच्चो के लिए छोटी सी उम्र में ही बच्चो को छोटी सी साईकिल ( पवा) फिर अददा मिल जाता है और हर गली मोहल्ले में छोटे छोटे बच्चे आप आसानी से इन्हे दौडाते हुए देख सकते हे उनके खुद के अपने नियम होते हे और मासूम बच्चे अपने एक्स्ट्रा समय में अपना मन बहलाने घूमने के लिए इनका इस्तमाल करते हे और इसी कारण वो छोटी सी उम्र में बाइक स्कूटी भी चला लेते हे
यदि ट्रैफिक नियमो की बात की जाए तो हम सभी जानते हे की 18 साल की उम्र के पहले ड्राइविंग लाइसेंस यातायात विभाग द्वारा ज़ारी नही किया जाता है हा कुछ विशेष परिस्थिति में स्कूल जाने वाले बच्चो को इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए लर्निंग लाइसेंस जारी किया जाता है
आज के दौर के पेरेंट्स अपने बच्चो की हर चाहत को पूरा करने के लिए आतुर होते हे आज के दौर में बच्चो के बड़े लाड प्यार से पाला जाता है पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे तो जाहिर सी बात हे बच्चों को डिमांड को सोच विचार के साथ पूरा किया जाता था अगर मैं कहूं की आज के पेरेंट्स के लाड प्यार के देखूं तो ऐसा लगता हे जेसे पहले के दौर में मां बाप के द्वारा बच्चो के लाड प्यार ही नही किया जाता था लेकिन ऐसा नही है पहले पेरेंट्स दूर दृष्टि रखते हुए फैसले लेते थे

हर गली मोहल्ले में फूल स्पीड में बडी बडी गाड़ियों को छोटे छोटे बच्चे फुल स्पीड मे दोडाते हुऐ देखे जाते हे यहां तक कि पुलिस थानों के सामने से भी यह बेखौफ गाड़ी भगाते हे और कुछ पढ़े लिखे समझदार भी हर समय इतनी जल्दी में होते हैं कि वो भी मोहल्लो में गाडियां तेज स्पीड में चलाते हे ट्रैफिक के सारे नॉर्म्स को ताक में रख दिए जाते हे नतीजा यह होता है की आए दिन हमे एक्सीडेंट्स देखने को मिलते हे इन सब हालात के लिए छोटी सी उम्र में भारी भरकम गाड़ी अपने बच्चो को संभला देने वाले पेरेंट्स भी दोषी होते हे
क्या हम अपने बच्चो को अपने मोहल्लों में भी खेलने कूदने नही दे क्या उन्हे रोड पर चलने फिरने से पूरी तरह रोका जा सकता है नही बल्कि हमे अपने बच्चो को जवानों को और सभी बाइक राइडर को यह समझाना होगा ओर समझना होगा की किसी भी आबादी वाले एरिया में हम जब भी अपने दो पहिया वाहन से गुजरे तो यह अपने दिमाग में रखे की अचानक से कोई भी सामने आ सकता है कही ऐसा न हो की हमे नुक्सान हो जाय या हमारी छोटी सी लापरवाही किसी को बड़ा नुक्सान पहुंचा दे
साथ ही प्रशासन को भी चाहिए की 18 साल से कम उम्र के गाड़ी चलाने वालो को रोकने के लिए सख़्त कार्यवाही करें नगरपालिका को भी स्पीड ब्रेकर ओर साइन बोर्ड, ट्रैफिक स्पीड बोर्ड संकेतक के रूप में गली मोहल्लों की सड़को में लगाए ताकि गली मोहल्लों में आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके साथ ही पेरेंट्स को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और खुद भी अपनी स्पीड पर कंट्रोल करें और अपने बच्चो को जब गाड़ी उनके हवाले करे तो उन्हें भी सख़्त ताकीद करे !

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हैदर अली अंसारी


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