पुस्तक – इकिगाई (लेखक – हेक्टर गार्सिया और फ्रांसिस मिरेलस) हिन्दी अनुवाद – प्रसाद ढापरे

Sufi Ki Kalam Se

इकिगाई
लेखक हेक्टर गार्सिया और फ्रांसिस मिरेलस
हिन्दी अनुवाद – प्रसाद ढापरे


इकिगाई का मतलब होता है अर्थपूर्ण जीवन
इकिगाई एक जापानी संकल्पना, एक जादुई शब्द है, जिसका मतलब होता है हमेशा व्यस्त रहने से मिलने वाला आनंद

ओकीनावा – ओकिनावा जापान का एक ऐसा शहर है जहां 24.55% से ज्यादा 100 साल से अधिक उम्र के लोग रहते हैं। ओकिनावा शहर की बात करे तो यह एक ऐसा प्राकृतिक शहर है जहां पर कोई ट्रेन नहीं जाती है। यहां के लोग ज्यादातर पैदल चलते हैं या फिर साइकिल से चलते हैं। इसके अलावा यहां के इंसान, दिन में 10 ग्राम नमक खाने के सरकारी नियम का पालन भी नियमित रूप से करते हैं।
यहां के लोगों की लंबी उम्र का एक राज यह भी है यहां के लोग विविधता पूर्ण खाना खाते हैं जिसमें सब्जियों की मात्रा ज्यादा होती है। यह लोग 206 प्रकार के पदार्थ खाते हैं और 1 दिन में कम से कम 18 प्रकार के पदार्थों का सेवन करते हैं। यह लोग एक दिन में 5 बार फल या सब्जियां खाते हैं साथ ही रोजाना चावल और नूडल्स भी खाते हैं। यह लोग शक्कर का सेवन बहुत कम करते हैं केवल गन्ने की बनी शक्कर का प्रयोग करते हैं।
ओकीनावा के लोग हफ्ते में तीन बार मछली खाते हैं।
खाने में मीठा और चॉकलेट बहुत कम खाते हैं।
जापान के लोग प्रतिदिन औसतन 2068 कैलोरी लेते हैं जबकि ओकीनावा के लोग मात्र 1785 कैलोरी प्रतिदिन लेते हैं ।

ओगिमी – ओकीनावा जापान में ही ओगिमि नाम का एक छोटा सा गांव है जिसकी आबादी लगभग 3000 है लेकिन आश्चर्य की बात है इस गांव में दुनिया के सबसे ज्यादा उम्र के लोग पाए जाते हैं। इस गांव के लोग कभी जिम जाकर एक्सरसाइज नहीं करते हैं बल्कि हमेशा कुछ न कुछ हलचल करते रहते हैं।

शिकुवासा – शिकुवासा जापान का एक ऐसा फल है जिसका आकार नींबू जैसा होता है और स्वाद में नींबू और संतरे जैसा ही खट्टा होता है। यह जापान के लोगों का एक मुख्य खाद्य फल है।

इचारीबा चौडे – इचारीबा चौडे का अर्थ है सभी के साथ भाई जैसा बर्ताव करना।





हारा हाची बु – इसका अर्थ होता है उतना ही खाईये, जिससे आपका पेट केवल 80% भरे। यह भी लंबी आयु का एक रहस्य है। जब आपको लगे कि आपका पेट भरने को आया है और थोड़ा और खा सकते हैं उसी वक्त खाना बंद कर दे। इस काम को अमल में लाने का एक आसान तरीका यह है खाने के बाद अगर आपको कुछ मीठा खाने की आदत है तो उसे बंद कर दे। इसके अलावा 80% खाने का नियम फालो करने के लिए हफ्ते में एक या दो दिन का उपवास भी किया जा सकता है। उपवास के भी कई फायदे हैं जिसने खाना हजम होना सबसे मुख्य फायदा है

ओकिनावा की खाद्य संस्कृति के 15 कुदरती एंटीआक्सीडेंट –
1 – टोफू
2 _ मिसो
3 – टुना मछली
4 – गाजर
5 – गोया ( करेला)
6 – कोंबु ( समुद्री वनस्पति)
7 – गोभी
8 – नोरी
9 – प्याज
10 – सोया
11 – हेचिमा ( ककड़ी जैसा पदार्थ
12 – सोयाबीन ( बिना पके और उबले हुए)
13 – मीठे आलू ( शकरकंद)
14 – मिरपुड़
15 – सनपिन छा ( जैस्मीन और ग्रीन टी का मिश्रण


मोआई – मोआई एक ही उद्देश्य से इकट्ठे हुए लोगों का गुट होता है जो आपस में चंदा इकट्ठा करते हैं और एक खेल खेलते हैं। खेल खेलने के बाद जो पैसा बचता है उसे किसी एक सदस्य को दे देते हैं और उस सदस्य का चयन रोटेशन के हिसाब से करते हैं।

लोगोथैरेपी – डॉक्टर विक्टर फ्रकंल का दिया हुआ यह फार्मूला लोगो थेरेपी, आपको जीवन जीने के लिए एक अच्छा सा मकसद ढूंढने में मदद करता है।

संडे न्यूरोसिस – किसी छुट्टी के दिन ज्यादातर लोगों के पास कोई मकसद नहीं होता है, इसे ही संडे न्यूरोसिस के नाम से जाना जाता है।

मोरिता थैरेपी – मोरिता थैरेपी में भावनाओं को जानकर उनको स्वीकार करने की सलाह दी जाती है।
फ्लो –
जब हम सबसे पसंदीदा काम करते हैं तो हमें अपने इंद्रियों और समय बीतने का कोई अनुभव नहीं होता है। हमें यह सोचना चाहिए कि ऐसा कौन सा काम है जिसे करते वक्त हम सबसे ज्यादा आनंदित होते हैं और सारा समय भूल कर उस में खो जाते हैं इस सवाल का जवाब ढूंढना ही इकिगाई है और इसी को फ्लो भी कहा जाता है।

मल्टीटास्किंग – लोगों को गलतफहमी है कि एक साथ एक से ज्यादा काम करने से समय बचता है जबकि यह साबित हो चुका है कि इसके उल्टे ही परिणाम होते हैं। आज की पीढ़ी मल्टीटास्किंग के कामों से ग्रसित है। एक सर्वे के अनुसार एक साथ एक से ज्यादा काम करने की वजह से कार्य क्षमता 60% और आई क्यू लेवल 10 पॉइंट कम हो जाता है।
– अगर 25 मिनट काम करते हैं तो 5 मिनट और 50 मिनट काम करते हैं तो 10 मिनट का आराम करें।

गबांरू – इसका मतलब होता है किसी काम को पूरा करते वक्त निरंतरता से काम करते रहना अगर हमेशा फलों में रहना है तो कोई ना कोई अर्थ पूर्ण चुनौती हमारे सामने होना जरूरी है।

वाबी साबी और इचिगो इचिइ – अपूर्णता में सुन्दरता खोजना ही असली कला है। इचिगो इचिइ हमे वर्तमान में खुशी से जीने की प्रेरणा देता है।

– जोश से भरा हुआ मन हमेशा आपको जवान रखता है और उम्र बढ़ने के आसार कम दिखाई देते हैं।
– यदि हम मानसिक व्यायाम नहीं करे तो न्यूरोलॉजिकल यंत्रणा कमजोर होने लगती है इसलिए दिमाग को हमेशा उत्तेजित और कार्यक्रम रखने के लिए उसे व्यायाम मिलना ही चाहिए।
– भले ही हमें कठिन लगे, तनाव महसूस हो, लेकिन तब भी हमें आराम के दायरे से बाहर आना बेहद जरूरी होता है।
– तनाव से शरीर का जितना नुकसान होता है बाकी किसी और वजह से नहीं होता है।
– बुढापा टालना है तो तनाव मुक्त रहने की कला सीखनी होगी हालांकि कम मात्रा का तनाव हमारे लिए फायदेमंद होता है।
– एक ही जगह बैठे रहने से हाइपरटेंशन, बदहजमी, हृदय रोग, हड्डियों का कमजोर होना जैसी तकलीफें शुरू हो जाती है।

टिप्स –
– हर एक के अंदर इकिगाई छिपा है जिसे खोजने के लिए संयम की आवश्यकता होती है।
– जापान के लोग कभी रिटायर नहीं होते हमेशा कार्यशील होते हैं।
– कुछ लोगों के लिए तो दूसरों की मदद करना ही उनका इकिगाई होता है और वही उनके शतायु जीवन का कारण होता है।

– ज्यादा से ज्यादा पैदल चलें।
– लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
– सामाजिक कामों में शामिल हो।
– फल खाना शुरू करें।
– 7 से 9 घंटे की नींद ले क्यूंकि नींद को भी युवा रहने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।
– छोटे बच्चों या जानवरों के साथ खेलें।

– बिना परिणामों पर लक्ष्य केंद्रित किए, आप जो कर रहे हो वह करते रहे।



अल्बर्ट आइंस्टीन का सापेक्षता नियम – अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है कि गैस के ऊपर हाथ रखने मेें 1 मिनट भी 1 घंटे जैसा लगता है जबकि किसी सुंदर लड़की का हाथ पकड़ कर 1 घंटे बैठना भी केवल पलभर जैसा लगता है।

आइंस्टीन ने जब आखिरी सांस ली तो उससे कुछ पल पहले ही उन्होंने एक सूत्र लिखा था सूत्रों की खोज करना और संगीत का आनंद लेना बस यही दो आइंस्टाइन के इकिगाई थे।

– बिल गेट्स रोजाना शाम को बर्तन मांजते थे और हर दिन कल की तुलना में अच्छा करने की कोशिश करते, इसके अलावा कभी-कभी वह ऑफिस की दीवारें भी रंग दिया करते थे।

– जब हम फ्लो में नहीं होते हैं तो एक काम करते वक्त हमारा मन, दूसरे विचारों में खोया रहता है।
– अपनी क्षमता से थोड़ा बाहर का लक्ष्य तय करें जिससे हमें प्रेरणा भी मिलेगी और चुनौतियों का एहसास भी होगा। एकाग्रता से काम करना है तो अपना काम क्षमता से थोड़ा कठिन होना चाहिए।
– हर बार काम करते वक्त उसने कुछ ऐसा जोड़ें जिससे आपकी आराम सीमा टूटे।
– काम शुरू करने से पहले स्पष्ट लक्ष्य का होना जरूरी है और उतना ही जरूरी है, काम शुरू होने के बाद उसमें अपने आप को झोंक देना।




– जापान के लोग कुदरत और टेक्नोलॉजी को मिलाने में माहिर है। यह कभी कुदरत और टेक्नोलॉजी का युद्ध नहीं होने देते हैं, बल्कि दोनों का एक साथ फायदा लेते हैं।

– आपके अंदर चलने वाली सांस की मदद से आप अपने अंदर चलने वाले विचारों के भूचाल को शांत कर सकते हैं।

मेडिटेशन – हमारा मन, विचारों कल्पना और भावनाओं का एक समंदर है और यह सब मिलकर तूफान तैयार करते हैं।
– ध्यान करते वक्त हमारे मस्तिष्क में अल्फा और थेटा तरंगे उठती है। नींद में जाने से पहले और गर्म पानी से नहाने के बाद, कुछ समय तक, हम इन तरंगों का आनंद ले सकते हैं।

– धर्म का पालन करना इंसान का मूल स्वभाव है। जापान में विशेष रूप से कन्फ्यूशियस, बुद्धिज्म और शिन्तोइज्म धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं। धार्मिक रीति-रिवाजों के आधार पर फ्लो को ढूंढना और उसने काम करना आसान है, क्योंकि धर्म सब नियमों से बड़ा होता है।
– नए-नए कामों की खोज करें जो आपको फ्लो मे ला सके है, जैसे फोटोग्राफी का शौक है तो इससे संबंधित दूसरे काम भी करके देखें हो सकता है उसमें भी आपको फ्लो का अनुभव हो।

अब हम जानेंगे जापान में लंबी आयु जीने वाले लोगों के महत्वपूर्ण कथन और कारण –

1 – मिसाओ ओकावा (117 वर्ष) कथन –
खाना खाइए, नींद लीजिए, आपको आराम करने की कला सीखनी होगी।

2- मारिया कपोव्हिला 116 वर्ष – इन्होंने कभी मांसाहार नहीं किया।

3 – जीने कॉल्मेंट 112 वर्ष – यह 100 साल की उम्र तक साइकल चलाते रहे हैं।

4 – वॉल्टर ब्रेउनिंग 115 वर्ष –
कथन – ” अगर आपने अपने मन और शरीर को सक्रिय रखा तो आप यकीनन लंबी उम्र पाएंगे” उन्होंने जिंदगी की आखिरी उम्र तक व्यायाम किया।

5 – अलेक्जेंडर इमिच 111 वर्ष – इन्होंने कभी कभी नशा नहीं किया।

मशहूर लेखक T. H. White का कथन है , ” भले ही आप बुजुर्ग हो जाएं, आपका शरीर थक जाए, शरीर में बहुत ज्यादा तकलीफ हो, दर्द रात दिन आपको जगाता रहे, आपकी प्यारी पत्नी आपको छोड़कर चली गई हो, आपके सारे सपने नष्ट हो गए हो, फिर भी हमेशा सीखते रहे क्योंकि यही एक चीज है जो परिस्थितियों को बदल सकती है।”

लेखक एल्सवर्थ केली ने कहा था की” यह बहुत बड़ा भ्रम है की उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारी इंद्रियां कमजोर होती है, जबकि मुझे ऐसा लगता है जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है हम ज्यादा एक्टिव होते जाते हैं।

इस किताब में ज्यादा उम्र वाले जिन लोगों की लेखकों ने चर्चाएं की उनमें सब के पास खुद के सब्जियों के बगीचे थे। चाय के बागान थे। आम और शिकुवासा के बगीचे थे। उन सब लोगों के अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध थे। वहां कोई भी फ्री नहीं घूमता था, यहां तक कि उन्होंने पार्क की किसी बेंच पर बुजुर्गों को भी आराम करते हुए नहीं देखा था।

उच्च भावनाओं के लिए ध्यान –
किताब में बताया गया है कि जो चीजे हमारे नियंत्रण में नहीं होती है उनके बारे में चिंता करने का कोई फायदा नहीं है।
इपिक्टेटस कहते हैं कि आपके साथ क्या घटना होती है यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आप उस घटना पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

जैन बुद्धिज्म मानता है कि इच्छाओं और आकांक्षाओं को सजगता से देखना और उनसे मुक्त होना जरूरी है क्यूंकि वर्तमान काल ही ऐसा काल है जिस पर हमारा नियंत्रण होता है।

सारांश
ओगिमी के लोगों से मिलने के बाद इकिगाई किताब के दोनों लेखकों को इकिगाई के 10 नियम समझ में आए जो इस किताब के सारांश भी कहे जा सकते हैं।
पहला – हमेशा काम करते रहें कभी रिटायर ना हो।
दूसरा – किसी भी काम में कोई जल्दबाजी ना करें । आराम और उत्साह के साथ काम को अपना 100 % दे।
तीसरा – पेट भर कर खाना ना खाएं, 80% तक ही खाएं।
चौथा – अच्छे मित्रों की संगत रखे, मित्रों और परिवार के साथ समय बिताएं।
पांचवा – अपने अगले जन्मदिन पर ज्यादा तंदुरुस्त रहने का टास्क सेट करें।
छठा – हमेशा हंसमुख रहें।
सातवा – कुदरत के साथ रहकर अपनी बैटरी चार्ज करते रहें यानि प्रकृति से जुड़े रहे।
आठवां – आपके जिन बुजुर्गों ने आपको शुद्ध हवा, शुद्ध खाना और जो कुछ भी दिया है उसके लिए उन्हें प्रतिदिन कम से कम एक बार धन्यवाद दें।
नवां – वर्तमान में जिए भूतकाल और भविष्य की चिंता ना करें।
दसंवा – अपने इकिगाई को सेट कर उसके हिसाब से जीवन जिंए।

नासिर शाह सूफ़ी


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