राजस्थान के अल्पसंख्यकों के लिए इमरान प्रतापगढ़ी के पिटारे में क्या है? (गेस्ट ब्लॉगर अख्तर खान अकेला)

Sufi Ki Kalam Se

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रिय चेयरमेन , विख्यात शायर इमरान प्रतापगढ़ी का , आगामी 26 , , 27 जुलाई के दो दिवसीय राजस्थान दौरे पर , जयपुर , अजमेर , जयपुर अजमेर मार्ग , पर , उनका ऐतिहासिक स्वागत होगा , , लेकिन उनकी यात्रा , अल्पसंख्यकों के हित संवर्धन , संघर्ष , उनको इंसाफ दिलाने में कितनी कामयाब साबित होगी , यह तो उनकी वापसी के वक़्त , उनके झुखे हुए , तेवर ,. या तीखे तेवरों से ही तय हो पायेगा ,,, वैसे इमरान प्रतापगढ़ी में बहुत कुछ करने का जज़्बा है , वोह विख्यात शायर होने के कारण गरीब , मज़लूम , नाइंसाफी के प्रति, संवेदनशील भी है , बोलने वाले भी है , आँखों में आँखे डालकर , समस्याओं पर बात करने वाले भी है , वोह क्या करते है , स्वागत सत्कार के बाद , देखते है उनकी हमदर्दी , उनकी संवेदनशीलता , उनका शायराना , अदबी अंदाज़ ,एक ब्रेक के बाद , ,
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रिय अध्यक्ष , श्रीमती सोनिया गाँधी ने , देश के अल्पसंख्यकों को कांग्रेस के पक्ष में जोड़ने , उनके दुःख ,दर्द , समस्याओं के समाधान कर , उनमे कांग्रेस के पक्ष में , जाग्रत करने के लिए , अल्पसंख्यक विभाग अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रिय अध्यक्ष पद पर , विख्यात शायर , इमरान प्रतापगढ़ी की जो नियुक्ति की है , राजस्थान के अल्पसंख्यकों की समस्याएं उनके समाधान , उनके प्रति इमरान प्रतापगढ़ी की कितनी परवाहदारी , कितनी ज़िम्मेदारी है , यह सब इमरान प्रतापगढ़ी के 26 , 27 जुलाई के दो दिवसीय राजस्थान दौरे से स्पष्ट हो जाएगा ,,,, राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है , कांग्रेस से अल्पसंख्यकों को , बेहतर से बेहतर उम्मीदें है , अशोक गहलोत सरकार ने , उनके फार्मूले छत्तीस क़ौमों के लिए , विकास , रोज़गारोन्मुखी योजनाओं के तहत काफी काम भी किये है , ,लेकिन ,, सिक्ख एकेडमी , गुरुद्वारों , गिरजाघरों सहित , मुस्लिम इबादत घरों की ज़रूरतें , उनके निर्माण की जिला प्रशासन के समक्ष जीर्णोध्दार , मरम्मत की अटकी हुई स्वीकृतियां , क़ब्रिस्तानों , शमशानों , सिक्ख समाज के पृथक शमशान , क्रिश्चियन समाज के पृथक क़ब्रिस्तान , ,सहित कई समस्याएं ऐसी है , जिन ,पर , चुनावी आचार संहिता , सरकार के खिलाफ , सरकार गिराने वालों की ब्लेकमेलिंग की सियासते , वगेरा कई रुकावटें होने से , अभी कई काम , चाहकर भी नहीं हो पा रहे है , राजस्थान में , अल्पसंख्यक आयोग , अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम , मेवात बोर्ड , वक़्फ़ विकास परिषद ,, पंद्रह सूत्रीय कल्याणकारी कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति , उर्दू एकेडमी , वक़्फ़ बोर्ड , उर्दू निदेशालय की स्थापना , मदरसा बोर्ड , सच्चर आयोग , रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट के अनुसार ,, भर्ती बोर्डों , लोक सेवा आयोग , सुचना आयोग में , भागीदारी , हिस्सेदारी ,, स्कूलों , कॉलेज में उर्दू विषय को बढ़ावा देने की योजनाए ,, मदरसा बोर्ड के ज़रिये , मदरसा पैराटीचर्स के मानदेय वृद्धि सहित , उनके कल्याण की योजनाए , वक़्फ़ सम्पत्तियों का नया सर्वेक्षण कर , नए सम्पत्ति रजिस्टर की अधिसूचना ,, वक़्फ़ सम्पत्तियों का विकास , वक़्फ़ सम्पत्तियों से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाहियां , ,सिक्ख एकेडमी का गठन ,, क्रिचियन चर्च की देखरेख समितियां ,, पुलिस समितियों ,, जिला समितियों , प्रदेश कांग्रेस , जिला , ब्लॉक कांग्रेस , सहित सियासी नियक्तियों में , अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी , भागीदारी , को लेकर , अल्पसंख्यकों में , उनके प्रतिनिधियों में भारी उत्सुकता है , अभी तक सार्वजनिक रूप से , इस मामले में , किसी भी , ज़िम्मेदार ने , खुलकर आवाज़ें नहीं उठाई है , राजस्थान में ,कई जर्जर , ऐसे धार्मिक स्थल है , जिनकी अपनी वक़्फ़ की ज़मीन , उनका अपना रुपया , ज़मीन बाउंड्री के अंदर , और धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार को लेकर , कोटा सहित , अलग अलग ज़िलों में ,स्वीकृति दने , निर्माण की बढ़ाये हठाकर , स्वीकृति जारी करने के मामले में बहाने बाज़ी चक्कर बाज़ी , जिला स्तर के लोगों को निराश किये हुए है ,, अल्पसंख्यकों की आम शिकायत है , के उनके नाम पर , अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी , चिंतन , मंथन करके , अल्पसंख्यकों की समस्याओं , उनके समाधानों पर चर्चा , उनके समाधानों के प्रयास , और जो भी अड़चनें पैदा कर रहा है उसके खिलाफ , नामज़द रिपोर्टिंग के साथ , श्वेत पत्र जारी करने के लिए , , अल्पसंख्यकों की सियासी , संगठनात्मक हिस्सेदारी के लिए , पृथक से अल्पसंख्यक विभाग बनाकर , विशेषज्ञ की ज़िम्मेदारी दी जाती है , ताकि , खुसूसी तोर पर इन समस्याओं पर सुनवाई , इनके निराकरण के प्रयास हो सकें , और जो लोग , संगठन की छत्तीस क़ौमों की हिस्सेदारी , ज़िम्मेदारी की सोच के खिलाफ , प्रशासनिक स्तर पर ,या फिर संगठनात्मक स्तर पर , ऐसे मामलों में अड़चने डाल रहे है , उनके खिलाफ ,, जिला अल्पसंख्यक इकाई , प्रदेश अल्पसंख्यक इकाई , राष्ट्रिय अल्पसंख्यक इकाई ,, खुलकर ,रिपोर्ट तय्यार करे ,, और मुख्यमंत्री , पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष , मंत्रियों , ज़िम्मेदारों से , प्रभारियों से , इन मामलों पर खुलकर चर्चा हो , फिर भी समस्याओं के समाधान में , लापरवाही , लेटलतीफी हो , तो ऐसे लोगों को सूचीबद्ध कर ,उनके उपेक्षित रवय्ये की प्रमाणिक शिकायतों के साथ , अखिल भारतीय कोंग्रेस अध्यक्ष को , विस्तृत रिपोर्ट सौंप कर ,ऐसे ज़िम्मेदारों के खिलाफ अनुशानात्मक कार्यवाही की सिफारिश करे , लेकिन , कई सालों से , राष्ट्रीय अध्यक्ष आते ,है अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज़ के यहाँ चादर पेश करते ,है स्वागत , सत्कार , साफाबंदी करवाते है ,, प्रेस कॉन्फ्रेंस करते है , सब कुछ सही चल रहा है , कहते है , जय जय कार ज़िंदाबाद करवाते है , राजस्थान के लोगों की अपनी आदत के मुताबिक़ , यहां के लोग , इनकी मेज़बानी में , पलक पावणे बिछाते है , सैकड़ों , हज़ारों तादाद में अपने घर बार , रोज़गार छोड़कर , कोरोना गाइड लाइन की परवाह किये बगैर जय जय कार करते है , फिर , सेल्फी , थोड़ा बहुत मेलजोल का दौर शुरू होता है , सोशल मीडिया पर हीरो गिरी होती है , बस फिर , समस्याएं जस की तस , उपेक्षाएँ जस की तस , और यह लोग , फिर राजस्थान से चले जाते है , हवाईजहाज़ से आते है , हवाईजहाज़ से चले जाते है , इनके मोबाइल नंबर , यह लोग उठाते नहीं , शिकायतों के पत्रों पर क्या करते है , सुचना देते नहीं , इनके ई मेल सारवजनिक नहीं करते ,, रोज़ इनके ई मेल पर कितनी शिकायतें , सुझाव आते है , कोई जवाब आता नहीं , कोई हेल्प डेस्क नहीं , कोई मोबाइल नंबर इन तक सम्पर्क स्थापित करने का नहीं , है तो यह लोग उठाते नहीं यही सब अभी तक चलता आया है , यक़ीनन , इमरान प्रतापगढ़ी , सियासी नहीं है , अभी उनमे सियासत से ज़्यादा , अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने का हुनर है , एक ज़िम्मेदारियाँ निभाने का जज़्बा है , , नो जवान है , उन्हें कॉम की फ़िक्र है , उर्दू की फ़िक्र है , मदरसों की फ़िक्र है , अल्पसंख्यक विकास की फ़िक्र है , वक़्फ़ सम्पत्तियों की फ़िक्र है , उर्दू के खाली पदों को भरवाने , मदरसों को आधुनकिकरण करवाने , मदरसा पैराटीचर्स का मानदेय बढ़वाने ,, सभी आयोगों , अल्पसंख्यक आयोगों के गठन , और दूसरे आयोगों ,में भी हिस्सेदारी , सरकार , संगठन में हिस्सदारी के प्रति वोह ईमानदारी से ,, कुछ ईमानदारी से करने का ख्वाब देख रहे है , कोशिश कर रहे है , ,वोह शायर है , विख्यात शायर है , साहित्यकार है ,, वोह इस पिछड़ी क़ौम ,दबे कुचले लोगों का दर्द समझते है ,वोह किसी भी प्रदेश के मुख्यमंत्री , संगठन के प्रदेश अध्यक्ष , मंत्री से आँखों में आँखे डालकर , अल्पसंख्यकों की उपेक्षा को लेकर , सवाल जवाब करने का जज़्बा रखते है , वोह राजस्थान सहित , पुरे देश के हर प्रदेश , हर ज़िले , हर ब्लॉक , तक , एक महीने के कार्यक्रम के तहत , अल्पसंख्यक विभाग कांग्रेस कमेटियों के गठन , उनके पदाधिकारियों की घोषणा करने की ज़िम्मेदारी निभाने की ईमानदाराना हिम्मत रखते है ,, अभी हाल ही में , अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रिय संयोजक , आज़म बेग के नेतृत्व में , जयपुर में ,एक बैठक आयोजित कर , सभी ने , इन मुद्दों पर नाराज़गी ज़ाहिर की है , कोटा में भी झालवाड़ रोड , बरकत उद्यान के इबादतगर की , जीर्णोद्धार , प्रशासनिक स्वीकृति , सहित , राजस्थान की कई समस्याओं पर विचार होना है ,, इमरान प्रतापगढ़ी का राजस्थान की पिंक सिटी जयपुर के एयरपोर्ट पर उतरने से लेकर , उनके वापस जाने तक , उनका स्वागत , ऐतिहासिक रहेगा , उनसे काफी लोग मिलेंगे भी , वोह भी कई लोगों से मिलेंगे ,लेकिन , वोह राजस्थान के अल्पसंख्यकों को , मज़बूती देने ,, उनको हिस्सेदारी दिलवाने , उनके सभी बोर्ड , आयोग , समितियों को तत्काल गठन करवाने , दूसरे आयोग , ,समतियों में हिस्सेदारी दिलवाने , इबादत घरों के जीर्णोद्धार स्वीकृत्तियों ,में बेवजह , अनावश्यक अड़ंगेबाज़ियों को दूर करवाने के मामले में , क्या संघर्षषील रव्वैया अपनाते है , या फिर अभी तक के मूकदर्शक , ज़िंदाबाद की तरह , जो होता रहा है , उसी का हिस्सा बनकर , एक इतिहास बन जाते है , इसका राजस्थान के अल्पसंख्यकों को बेसब्री से इन्तिज़ार है ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

@गेस्ट ब्लॉगर अख्तर खान अकेला

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